नई दिल्ली: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल Cannes Film Festival में भारतीय सिनेमा का सफर कई ऐतिहासिक उपलब्धियों और यादगार पलों से भरा रहा है. भारतीय फिल्मों, निर्देशकों और कलाकारों ने दशकों से इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है. कभी फिल्मों को वैश्विक सराहना मिली, तो कभी भारतीय सितारों के रेड कार्पेट लुक्स ने दुनिया भर का ध्यान खींचा.
कान्स फिल्म फेस्टिवल का 79वां संस्करण एक बार फिर शुरू हो चुका है और इस मौके पर भारतीय सिनेमा के उस गौरवशाली सफर को याद किया जा रहा है, जिसने भारत को विश्व सिनेमा के मानचित्र पर खास पहचान दिलाई.
भारत ने पहली बार 1946 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया था. Neecha Nagar इस प्रतिष्ठित समारोह में बड़ी सफलता हासिल करने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी.
उस समय फिल्म को महोत्सव का सर्वोच्च सम्मान पाल्मे डी'ओर, जिसे तब ग्रैंड प्रिक्स कहा जाता था, प्रदान किया गया था. यह भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक बेहद गौरवपूर्ण क्षण माना जाता है.
भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सत्यजीत रे का योगदान बेहद अहम रहा. उनकी फिल्मों को कान्स फिल्म फेस्टिवल में लगातार सराहना मिली और वैश्विक दर्शकों ने भारतीय कहानी कहने की शैली को खूब पसंद किया.
अरण्येर दिन रात्रि, प्रतिद्वंदी, चारुलता, पाथेर पांचाली, घरे बाइरे, देवी, पराश पाथर और उत्तरान जैसी फिल्मों का प्रदर्शन कंस में किया गया था.
साल 1988 में Salaam Bombay! ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में जबरदस्त प्रशंसा हासिल की. फिल्म को कैमरा डी'ओर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
इस फिल्म की सफलता ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई और इसकी निर्देशक Mira Nair को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि मिली.
कान्स फिल्म फेस्टिवल सिर्फ फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि फैशन और ग्लैमर के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है. भारतीय सितारों ने भी यहां अपने शानदार अंदाज से लगातार सुर्खियां बटोरी हैं.
ऐश्वर्या राय बच्चन, दीपिका पादुकोण, सोनम कपूर और प्रियंका चोपड़ा जैसे सितारों ने रेड कार्पेट पर अपने लुक्स से माहौल का ध्यान खींचा.
साल 2022 भारतीय सिनेमा के लिए बेहद खास रहा, जब भारत को कान्स फिल्म फेस्टिवल में 'सम्मानित देश' के रूप में चुना गया.
उसी वर्ष दीपिका पादुकोण को फेस्टिवल की जूरी में शामिल होने का मौका मिला, जिसे भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया.
हाल के वर्षों में भारतीय फिल्मों ने कान्स में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. All We Imagine as Light ने 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रतिष्ठित ग्रैंड प्रिक्स पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया.
फिल्म की निर्देशक पायल कपाड़िया को बाद में 2025 में जूरी सदस्य के रूप में भी चुना गया. इस उपलब्धि ने साबित किया कि भारतीय सिनेमा अब केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी कहानियां वैश्विक दर्शकों को भी गहराई से प्रभावित कर रही हैं.
आज कान्स फिल्म फेस्टिवल भारतीय सिनेमा के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय मंच नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और कहानियों को दुनिया के सामने पेश करने का सबसे बड़ा अवसर बन चुका है. First Updated : Tuesday, 12 May 2026