भारत की सैन्य ताकत को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. भारतीय सेना को जल्द ही 30,000 करोड़ रुपये की लागत वाला एक नया और अत्याधुनिक एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलने जा रहा है. ये मिसाइल प्रणाली दुश्मन के हवाई हमलों का बेहद सटीकता से जवाब देने में सक्षम है और खासतौर पर देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं की रक्षा में निर्णायक भूमिका निभाएगी.
इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम का नाम QRSAM (Quick Reaction Surface to Air Missile System) है. इसे भारत की प्रमुख रक्षा संस्था DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है. ये आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है.
QRSAM एक मोबाइल और ऑटोमैटिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जो किसी भी हवाई खतरे पर बेहद तेज और सटीक जवाब देने में सक्षम है. इसकी अधिकतम रेंज 30 किलोमीटर तक है और ये किसी भी लक्ष्य को सिर्फ 30 से 40 सेकंड में नष्ट कर सकता है. ये सिस्टम खास तौर पर निम्न ऊंचाई पर उड़ रहे एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर और ड्रोन जैसे लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है.
इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऑटोमैटिक फायर कंट्रोल सिस्टम है. जैसे ही कोई हवाई खतरा रडार की पकड़ में आता है, QRSAM तुरंत उसे पहचान कर जवाबी हमला करता है. इसमें मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती, जिससे प्रतिक्रिया समय न्यूनतम हो जाता है और खतरे का त्वरित निपटारा संभव होता है.
QRSAM में मल्टी-फंक्शन रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरण लगे हैं. ये सभी मिलकर एक 360 डिग्री का सुरक्षा कवच तैयार करते हैं, जिससे हर दिशा से आने वाले हवाई खतरों को समय रहते भांपा जा सकता है और उन्हें निष्क्रिय किया जा सकता है.
QRSAM को DRDO ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ मिलकर पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और विकसित किया है. इस मिसाइल प्रणाली का निर्माण आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किया गया है और ये देश की तकनीकी क्षमताओं का प्रतीक है.
भारतीय सेना में QRSAM को शामिल करने के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का बड़ा रक्षा सौदा किया गया है. इस सौदे से भारतीय वायु रक्षा प्रणाली को नई ऊंचाइयां मिलेंगी और ये भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में भारत को तकनीकी और सामरिक बढ़त दिलाएगा. First Updated : Wednesday, 11 June 2025