नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर से लगातार दाखिल हो रही SIR (स्टेट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) संबंधी याचिकाओं पर कड़ी आपत्ति जताई. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि विभिन्न राज्यों से आ रही नई याचिकाओं का बोझ मुख्य मामले की सुनवाई को प्रभावित कर रहा है.
उन्होंने नाराजगी जताते हुए पूछा, “अगर हर दिन नई-नई याचिकाएं दाखिल होती रहेंगी, तो हम मुख्य मुद्दे पर सुनवाई कब करेंगे?” सीजेआई का कहना था कि अदालत का समय सीमित है और राजनीतिक रंग वाली बार-बार की याचिकाएं मामले की गंभीरता को कमजोर कर रही हैं.
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे अलग-अलग राजनीतिक समूह सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु से आई कई याचिकाओं पर असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि दाखिल करते रहिए… राजनीतिकरण करते रहिए… लेकिन इसका असर मुख्य मामले पर पड़ रहा है. अदालत ने साफ किया कि गंभीर संवैधानिक मुद्दे से जुड़े SIR विवाद को राजनीतिक मंच नहीं बनने दिया जाएगा.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने उत्तर प्रदेश का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य बहुत बड़ा है और तय समय सीमा के भीतर SIR पूरा कर पाना मुश्किल होगा. इस पर सीजेआई ने उत्तर प्रदेश सरकार की दलील पर नोटिस जारी किया और अगले मंगलवार को इस पर विस्तृत सुनवाई निर्धारित कर दी. सीजेआई ने फिर दोहराया कि लगातार की जा रही हस्तक्षेप याचिकाओं से मुख्य केस की दिशा बिगड़ रही है और इससे न्यायिक प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है.
तमिलनाडु की ओर से पेश हुए एक वकील ने दलील दी कि राज्य के प्रवासी मजदूर पोंगल त्योहार के बाद ही वापस लौटते हैं, इसलिए SIR प्रक्रिया में देरी हो सकती है. वकील ने अनुरोध किया कि अदालत इस सामाजिक परिस्थिति को ध्यान में रखे.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह ‘सबसे पहले बिहार के मामले की सुनवाई’ करेगी, क्योंकि बिहार से जुड़े प्रश्नों पर आने वाला फैसला सभी राज्यों के SIR मामलों को प्रभावित करेगा. अदालत ने संकेत दिया कि समान मानक देशभर में लागू होंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह SIR से जुड़े मूल संवैधानिक प्रश्न को प्राथमिकता दे रही है और अनावश्यक याचिकाओं के कारण प्रक्रिया को भटकने नहीं दिया जाएगा. अदालत ने सभी पक्षों को संयम बरतने, राजनीतिक लाभ से बचने और न्यायिक मर्यादा का पालन करने की सलाह दी.
First Updated : Tuesday, 09 December 2025