नई दिल्लीः आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि आज इंटरनेट तक पहुंच अब कोई बड़ी बाधा नहीं रही है. रिपोर्ट में विशेष रूप से 15 से 29 वर्ष के युवाओं में इंटरनेट और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से जुड़े जोखिमों पर ध्यान आकर्षित किया गया है. इसमें डिजिटल लत, ऑनलाइन सामग्री की गुणवत्ता, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन पर इसके प्रभावों पर जोर दिया गया है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ऐप्स पर अत्यधिक निर्भरता युवाओं और वयस्कों दोनों के लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम ला सकती है. इसमें अध्ययन और काम के घंटों की हानि, कार्यस्थल उत्पादकता में कमी, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और जोखिमपूर्ण ऑनलाइन व्यवहारों से वित्तीय नुकसान शामिल हैं.
सर्वेक्षण में मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटल लत के प्रभाव को प्रमुखता दी गई है. बताया गया है कि अत्यधिक इंटरनेट उपयोग से किशोरों और युवा वयस्कों में चिंता, अवसाद और आत्मसम्मान में कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसके अलावा, गेमिंग की लत ने भी ध्यान आकर्षित किया. रिपोर्ट के अनुसार, 'गेमिंग डिसऑर्डर' नींद में खलल, आक्रामकता, सामाजिक अलगाव और अवसाद को बढ़ावा दे सकता है, जिससे ऑनलाइन जुए जैसी हानिकारक आदतें भी विकसित हो सकती हैं.
साइबरबुलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम भी डिजिटल लत के कारण बढ़ जाते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल लत के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए संकेतकों का एक व्यापक सेट तैयार करना आवश्यक है.
डिजिटल लत से निपटना दुनिया के कई देशों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है. ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि वे ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रह सकें. चीन, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, फ्रांस, स्पेन, फिनलैंड, जापान और अमेरिका के कुछ राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए गए हैं.
हालांकि भारत में डिजिटल लत से निपटने में सबसे बड़ी चुनौती व्यापक राष्ट्रीय आंकड़ों की कमी है. सर्वेक्षण में कहा गया कि डेटा की कमी के कारण लक्षित हस्तक्षेप, संसाधनों का उचित आवंटन और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीतियों में डिजिटल कल्याण के समेकन में बाधाएं आती हैं.
आर्थिक सर्वेक्षण ने डिजिटल स्वच्छता और ऑनलाइन सामग्री के चयन पर भी जोर दिया है. इसमें सुझाव दिया गया है कि युवाओं को शिक्षा, रोजगार और नागरिक भागीदारी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का लाभ उठाने के साथ-साथ डिजिटल लत से बचाने के लिए नियम और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए.
रिपोर्ट के अनुसार, आगामी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) से डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य पर कुछ ठोस और अनुभवजन्य आंकड़े प्राप्त होंगे, जो नीति निर्माण में मददगार साबित हो सकते हैं. First Updated : Thursday, 29 January 2026