नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग ने सोमवार (18 मई 2026) को एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने साफ किया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI सूचना का अधिकार कानून 2005 के तहत सार्वजनिक संस्था नहीं है। CIC ने कहा कि BCCI न तो सरकार द्वारा चलाया जाता है, न उस पर सरकार का नियंत्रण है और न ही उसे सरकार से कोई वित्तीय मदद मिलती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने अपने आदेश में बताया कि BCCI एक निजी संस्था है। यह तमिलनाडु सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत है। इसलिए यह RTI कानून की धारा 2(एच) में दी गई सार्वजनिक संस्था की परिभाषा में नहीं आती। इसी वजह से BCCI पर RTI लागू नहीं होता। आयोग ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में BCCI आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
दरअसल यह मामला 2018 से कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ था। तब के सूचना आयुक्त एम श्रीधर आर्चायालू ने BCCI को RTI कानून के दायरे में माना था। उन्होंने बोर्ड को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश भी दिया था।
BCCI ने इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को देखते हुए मामला वापस CIC को भेज दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आयोग नए सिरे से पूरे मामले को देखे और फिर आदेश जारी करे।
नए आदेश में CIC ने साफ किया कि BCCI RTI कानून 2005 की धारा 2(एच) की संवैधानिक शर्तों को पूरा नहीं करता। आदेश के मुताबिक BCCI का गठन न तो संविधान के तहत हुआ है और न ही संसद या किसी राज्य विधानसभा के किसी कानून से। आयोग ने BCCI के कामकाज, वित्तीय ढांचे और सरकार के साथ उसके संबंधों की गहराई से जांच की।
गौरतलब है कि सरकारी नियंत्रण के सवाल पर CIC ने कहा कि BCCI पर सरकार का कोई गहरा या व्यापक नियंत्रण नहीं है। बोर्ड पूरी तरह वित्तीय रूप से स्वतंत्र है। BCCI अपनी कमाई मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप, ब्रॉडकास्टिंग डील और टिकट बिक्री से करता है।
उसे सरकार से कोई फंड नहीं मिलता। इसी आधार पर आयोग ने माना कि BCCI को सार्वजनिक संस्था नहीं कहा जा सकता। इस फैसले के बाद BCCI पर RTI के तहत जानकारी मांगने का रास्ता बंद हो गया है।
First Updated : Monday, 18 May 2026