नई दिल्ली: ऑफिस में छुट्टी मांगना आज भी कई कर्मचारियों के लिए आसान नहीं होता, खासकर तब जब कोई नया कर्मचारी हो. कई लोग तबीयत खराब होने के बावजूद छुट्टी मांगने में झिझक महसूस करते हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक महिला कर्मचारी और उसके मैनेजर के बीच हुई चैट तेजी से वायरल हो रही है, जिसने ऑफिस कल्चर और पीरियड लीव को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
वायरल स्क्रीनशॉट में मैनेजर का अपनी कर्मचारी के प्रति संवेदनशील रवैया लोगों का ध्यान खींच रहा है. कुछ लोग इसे एक बेहतर और समझदार कार्यस्थल की मिसाल बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स का मानना है कि कर्मचारी की निजी स्वास्थ्य जानकारी पूछना प्रोफेशनल सीमाओं से जुड़ा सवाल हो सकता है.
एक्स यूजर नलिनी उनागर ने इस चैट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, असली पुरुष महिलाओें को सहज महसूस कराते हैं, उन्हें दोषी महसूस नहीं कराते. वायरल चैट में महिला कर्मचारी अपने मैनेजर को बताती है कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है और उसे काम के समय में थोड़ी राहत चाहिए. इस पर मैनेजर तुरंत उसकी बात मान लेता है.
इसके बाद मैनेजर पूछता है कि क्या परेशानी पीरियड पेन की वजह से है. कर्मचारी के हां कहने पर मैनेजर जवाब देता है, ठीक है, अपना ध्यान रखो. शायद तुम नई हो इसलिए तुम्हें अभी पता नहीं होगा. हमारी कंपनी में लड़कियों को पीरियड्स के दौरान तबीयत खराब होने पर 2-3 दिन की छुट्टी दी जाती है. तुम दो दिन ठीक से आराम करो.
छुट्टी मिलने के बाद भी महिला कर्मचारी थोड़ी असहज नजर आई. इसके बाद मैनेजर ने दोबारा भरोसा दिलाते हुए कहा, अरे बिंदास आराम करो, सैलरी कट नहीं होगी. बस यही लाइन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल हो गई. कई यूजर्स ने इसे संवेदनशील और सहयोगी व्यवहार बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे सामान्य कार्यस्थल समर्थन माना.
सोशल मीडिया पर इस वायरल पोस्ट को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ यूजर्स ने मैनेजर की तारीफ करते हुए कहा कि हर ऑफिस में ऐसा समझदार और सपोर्टिव बॉस होना चाहिए. वहीं कुछ लोगों का कहना था कि किसी कर्मचारी से उसकी हेल्थ से जुड़ा इतना निजी सवाल पूछना सही नहीं माना जा सकता. एक यूजर ने लिखा, जिस तरीके से उसने पूछा कि क्या यह पीरियड पेन है, उसके लिए सलाम. कई मैनेजर तो ऐसा पूछने से भी डरते हैं. इस पर पोस्ट शेयर करने वाली नलिनी उनागर ने जवाब दिया, नीयत मायने रखती है.
कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि अगर कंपनी में पहले से पीरियड लीव की पॉलिसी मौजूद है, तो इसमें अलग से तारीफ करने जैसी क्या बात है. एक यूजर ने लिखा, अगर कंपनी की पॉलिसी है तो इसमें खास क्या है? यह तो बेसिक सपोर्ट होना चाहिए. वहीं कई लोगों का मानना था कि कर्मचारी को बीमारी की पूरी जानकारी देना जरूरी नहीं होना चाहिए. उनके अनुसार, अगर किसी ने सिर्फ सिक लीव मांगी है तो बातचीत वहीं तक सीमित रहनी चाहिए थी.
यह वायरल पोस्ट अब कार्यस्थल पर महिलाओं के स्वास्थ्य, पीरियड लीव और प्रोफेशनल माहौल को लेकर बड़ी चर्चा का हिस्सा बन चुकी है. साथ ही इसने यह भी दिखाया कि आज भी कई लोगों के लिए ऑफिस में स्वास्थ्य और छुट्टियों पर खुलकर बात करना सहज नहीं है. First Updated : Sunday, 17 May 2026