Union Budget हमेशा 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता जानिए इतिहास और असली वजह
नए साल के साथ बजट पर निगाहें
हर नए साल की शुरुआत में देश की नजरें आम बजट पर टिक जाती हैं और लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि बजट के लिए 1 फरवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई.
Credit: social mediaआजादी के बाद चली पुरानी परंपरा
आजादी के बाद लंबे समय तक बजट एक तय परंपरा के तहत पेश किया जाता रहा, जिसे कई दशकों तक बिना बदलाव के अपनाया गया.
फरवरी के अंत में आता था बजट
पहले बजट फरवरी के आखिरी दिनों में पेश होता था, जिससे वित्तीय प्रक्रियाओं में देरी होती थी.
Credit: social media 2017 में बड़ा बदलाव
साल 2017 में केंद्र की मोदी सरकार ने इस पुराने सिस्टम को बदलने का फैसला किया.
Credit: social mediaअरुण जेटली की पहल
तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट की तारीख फरवरी के अंत से हटाकर 1 फरवरी करने की शुरुआत की.
Credit: social mediaबदलाव के पीछे सरकार की सोच
सरकार का मानना था कि पहले बजट आने से योजनाओं को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा.
Credit: social media1 फरवरी से मिला समय का फायदा
अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष से पहले बजट पेश होने पर फैसले जल्दी होते हैं और फंड जारी करने में देरी नहीं होती.
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