अजित पवार का राजनीतिक सफर: संघर्ष, सत्ता और विवादों की कहानी


2026/01/28 15:53:26 IST

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

    22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार, वरिष्ठ नेता शरद पवार के भतीजे हैं. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार हैं और उनके दो बेटे जय पवार और पार्थ पवार हैं, जो राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं.

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राजनीति में शुरुआती कदम

    अजित पवार ने महाराष्ट्र की पारंपरिक शक्ति संरचना माने जाने वाले सहकारी चीनी मिल नेटवर्क से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया. यहीं से उन्होंने राजनीतिक पकड़ बनाई और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की.

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लोकसभा में पहली जीत

    1991 में अजित पवार पहली बार बारामती लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी, जिससे पारिवारिक और राजनीतिक समीकरण और मजबूत हुए.

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विधानसभा में रिकॉर्ड जीत

    अजित पवार 1991 के उपचुनाव से लेकर 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 तक बारामती विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक चुने गए, जो उनकी मजबूत जनाधार को दर्शाता है.

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सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री

    अजित पवार गैर-लगातार अवधि में महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहे. उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया.

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2019 का बड़ा राजनीतिक मोड़

    नवंबर 2019 में अजित पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन कर बीजेपी समर्थित सरकार का साथ दिया और उपमुख्यमंत्री बने, जिसे महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम माना गया.

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पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह

    फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को सौंप दिया, जिससे पार्टी पर उनकी राजनीतिक पकड़ को औपचारिक मान्यता मिली.

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