UGC के नए नियमों पर देश में बहस
नए दिशा-निर्देश क्या कहते हैं?
UGC ने 13 जनवरी को 2026 के इक्विटी रेगुलेशन जारी किए, जिनके तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर, इक्विटी कमेटी और 24×7 शिकायत हेल्पलाइन बनाना अनिवार्य होगा.
Credit: social media ये नियम क्यों लाए गए?
UGC के अनुसार बीते पांच वर्षों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118 प्रतिशत बढ़ी हैं. SC, ST और OBC की कम भागीदारी और लगातार मिल रही शिकायतों के कारण भेदभाव रोकने के लिए नियम सख्त किए गए.
Credit: social media विरोध क्यों हो रहा है?
आलोचकों का कहना है कि नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं. उनका आरोप है कि झूठी शिकायतों से बचाव के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं और आरोप साबित करने की जिम्मेदारी भी स्पष्ट नहीं है.
Credit: social media निष्पक्षता पर क्या सवाल उठे?
नियमों में इक्विटी कमेटी में केवल आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व और संस्थान प्रमुख को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे निष्पक्ष जांच पर सवाल उठ रहे हैं और “रिवर्स बायस” की आशंका जताई जा रही है.
Credit: social media राजनीतिक विवाद कैसे बढ़ा?
उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में नेताओं और अधिकारियों ने नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए इस्तीफे दिए. कुछ नेताओं ने इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विरोध जताया.
Credit: social media विशेषज्ञ और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने कहा कि नियमों में संतुलन की कमी है. सोशल मीडिया पर #ShameOnUGC ट्रेंड हुआ, कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन हुए और सुप्रीम कोर्ट में PIL भी दायर की गई.
Credit: social media सरकार का रुख क्या है?
सरकार और BJP नेताओं ने कहा कि नियम सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होंगे. शिक्षा मंत्रालय ने गलतफहमियां दूर करने का आश्वासन दिया और संविधान के तहत समानता के सिद्धांत पर जोर दिया.
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