कैसे पड़ा चांदनी चौक का नाम


2026/02/08 15:23:39 IST

आधे चांद जैसा बाजार और जहांआरा बेगम की भूमिका

    चांदनी चौक का रूपरेखा आधे चांद के आकार में किया गया था, जो अपने आप में अनोखा था जिसे शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम ने तैयार करवाया थी.

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बीचों-बीच बहती थी नहर

    चांदनी चौक के बीच से एक खूबसूरत नहर बहती थी, जो फतेहपुरी मस्जिद से लाल किले तक जाती थी.

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चांदनी रोशनी का जादू

    चांदनी रात में नहर के पानी में चांद की रोशनी पड़ती थी, जिससे पूरा इलाका चमक उठता था.

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यहीं से पड़ा नाम

    चांद की रोशनी से जगमगाते इस चौक को लोगों ने 'चांदनी चौक' कहना शुरू कर दिया.

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व्यापार का केंद्र

    यह इलाका रेशम, मसालों और कीमती सामानों के व्यापार के लिए मशहूर था.

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वक्त के साथ बदला स्वरूप

    ब्रिटिश काल में 1870 के दशक में तालाब की जगह टाउन हॉल बना दिया गया, लेकिन नाम आज भी जिंदा है.

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आज भी इतिहास जिंदा है

    आज भी चांदनी चौक दिल्ली की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आत्मा माना जाता है.

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