कैसे पड़ा चांदनी चौक का नाम
आधे चांद जैसा बाजार और जहांआरा बेगम की भूमिका
चांदनी चौक का रूपरेखा आधे चांद के आकार में किया गया था, जो अपने आप में अनोखा था जिसे शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम ने तैयार करवाया थी.
Credit: social media बीचों-बीच बहती थी नहर
चांदनी चौक के बीच से एक खूबसूरत नहर बहती थी, जो फतेहपुरी मस्जिद से लाल किले तक जाती थी.
Credit: social media चांदनी रोशनी का जादू
चांदनी रात में नहर के पानी में चांद की रोशनी पड़ती थी, जिससे पूरा इलाका चमक उठता था.
Credit: social media यहीं से पड़ा नाम
चांद की रोशनी से जगमगाते इस चौक को लोगों ने 'चांदनी चौक' कहना शुरू कर दिया.
Credit: social media व्यापार का केंद्र
यह इलाका रेशम, मसालों और कीमती सामानों के व्यापार के लिए मशहूर था.
Credit: social media वक्त के साथ बदला स्वरूप
ब्रिटिश काल में 1870 के दशक में तालाब की जगह टाउन हॉल बना दिया गया, लेकिन नाम आज भी जिंदा है.
Credit: social media आज भी इतिहास जिंदा है
आज भी चांदनी चौक दिल्ली की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आत्मा माना जाता है.
Credit: social media View More Web Stories