भारत के इन हिस्सों मे पीढ़ियों से चली आ रही है लिव इन की परंपरा


2026/02/09 15:43:04 IST

मुरिया जनजाति और घोटुल परंपरा

    छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहने वाली मुरिया जनजाति में युवाओं को लिव-इन में रहने के लिए प्रेरित किया जाता है.

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घोटुल: रिश्तों की शुरुआत का केंद्र

    घोटुल बांस या मिट्टी की झोपड़ी होती है, जहां लड़के-लड़कियां नाच-गाना करते हैं और अपने साथी का चुनाव करते हैं.

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प्यार जताने का अनोखा तरीका

    मुरिया जनजाति में लड़का बांस की कंघी बनाता है, जिसे लड़की चुराकर प्यार का इजहार करती है और दोनों साथ रहने लगते हैं.

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गरासिया जनजाति की खुली सोच

    राजस्थान और गुजरात की गरासिया जनजाति में महिलाएं खुद साथी चुनती हैं और बिना शादी साथ रहने को मान्यता है.

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मेले से शुरू होता रिश्ता

    गरासिया समुदाय में मेलों के दौरान युवक-युवतियां एक-दूसरे को चुनकर साथ भाग जाते हैं और लिव-इन जोड़ा बनते हैं.

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मुंडा-कोरवा जनजाति और ढुकु विवाह

    झारखंड की मुंडा-कोरवा जनजाति में लिव-इन को ‘ढुकु विवाह’ कहा जाता है, जहां जोड़े 30-40 साल तक साथ रहते हैं. यहां रिश्ता दिल से माना जाता है, कागज से नहीं.

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शादी ज़रूरी नहीं, साथ रहना ही रिश्ता

    इन जनजातियों में बिना शादी साथ रहना सामाजिक रूप से स्वीकार्य है और बच्चे होने के बाद भी शादी जरूरी नहीं मानी जाती. अगर किसी लड़की को लिव-इन के बाद पार्टनर पसंद नहीं आता, तो वह बिना किसी डर या बदनामी के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है.

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