भारत के इन हिस्सों मे पीढ़ियों से चली आ रही है लिव इन की परंपरा
मुरिया जनजाति और घोटुल परंपरा
छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहने वाली मुरिया जनजाति में युवाओं को लिव-इन में रहने के लिए प्रेरित किया जाता है.
Credit: pinterestघोटुल: रिश्तों की शुरुआत का केंद्र
घोटुल बांस या मिट्टी की झोपड़ी होती है, जहां लड़के-लड़कियां नाच-गाना करते हैं और अपने साथी का चुनाव करते हैं.
Credit: pinterestप्यार जताने का अनोखा तरीका
मुरिया जनजाति में लड़का बांस की कंघी बनाता है, जिसे लड़की चुराकर प्यार का इजहार करती है और दोनों साथ रहने लगते हैं.
Credit: pinterest गरासिया जनजाति की खुली सोच
राजस्थान और गुजरात की गरासिया जनजाति में महिलाएं खुद साथी चुनती हैं और बिना शादी साथ रहने को मान्यता है.
Credit: pinterestमेले से शुरू होता रिश्ता
गरासिया समुदाय में मेलों के दौरान युवक-युवतियां एक-दूसरे को चुनकर साथ भाग जाते हैं और लिव-इन जोड़ा बनते हैं.
Credit: pinterest मुंडा-कोरवा जनजाति और ढुकु विवाह
झारखंड की मुंडा-कोरवा जनजाति में लिव-इन को ‘ढुकु विवाह’ कहा जाता है, जहां जोड़े 30-40 साल तक साथ रहते हैं. यहां रिश्ता दिल से माना जाता है, कागज से नहीं.
Credit: pinterestशादी ज़रूरी नहीं, साथ रहना ही रिश्ता
इन जनजातियों में बिना शादी साथ रहना सामाजिक रूप से स्वीकार्य है और बच्चे होने के बाद भी शादी जरूरी नहीं मानी जाती. अगर किसी लड़की को लिव-इन के बाद पार्टनर पसंद नहीं आता, तो वह बिना किसी डर या बदनामी के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है.
Credit: pinterest View More Web Stories