राशि अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग: जानें किस धाम की पूजा से मिलेगा विशेष फल


2026/02/14 13:46:18 IST

ज्योतिर्लिंगों का दिव्य महत्व

    भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के स्वयंभू और अत्यंत पवित्र धाम माने जाते हैं. इन्हें अनंत प्रकाश स्तंभ का प्रतीक समझा जाता है, जो दिव्य ऊर्जा और ब्रह्मांडीय चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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राशियों से विशेष संबंध

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग 12 राशियों से जुड़े हैं. व्यक्ति अपनी चंद्र राशि या लग्न के अनुसार संबंधित ज्योतिर्लिंग की उपासना कर ग्रहों के प्रभाव को संतुलित कर सकता है.

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मेष- रामेश्वरम धाम

    तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है. इसकी पूजा से आवेग, अधीरता और क्रोध पर नियंत्रण मिलता है तथा जीवन में स्पष्टता और निर्णय क्षमता बढ़ती है.

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वृषभ- सोमनाथ महादेव

    गुजरात का सोमनाथ चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है. इसकी उपासना भावनात्मक स्थिरता, सहनशीलता और मानसिक शांति प्रदान करती है तथा रिश्तों में संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है.

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मिथुन- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

    नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को राहु और सर्प दोष से रक्षा का प्रतीक माना जाता है. इसकी आराधना से बौद्धिक स्पष्टता बढ़ती है और चंचल स्वभाव पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है.

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कर्क- ओंकारेश्वर तीर्थ

    मध्य प्रदेश स्थित ओंकारेश्वर जल तत्व और गुरु के ज्ञान का प्रतीक है. इसकी पूजा से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक स्थिरता प्राप्त होती है.

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सिंह- वैद्यनाथ धाम

    झारखंड का वैद्यनाथ पंचम भाव और ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. इसकी उपासना से अहंकार कम होता है, स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन शक्ति की पुनर्स्थापना होती है.

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कन्या- मल्लिकार्जुन मंदिर

    आंध्र प्रदेश का मल्लिकार्जुन पृथ्वी तत्व और बुध से संबंधित माना जाता है. इसकी पूजा से सेवा भाव, कर्तव्यनिष्ठा और आध्यात्मिक उन्नति के बीच संतुलन स्थापित होता है.

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तुला- महाकालेश्वर धाम

    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर काल और न्याय का प्रतिनिधित्व करता है. इसकी आराधना से जीवन में सामंजस्य, संतुलन और समय के सही उपयोग की समझ विकसित होती है.

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वृश्चिक- घृष्णेश्वर मंदिर

    महाराष्ट्र का घृष्णेश्वर परिवर्तन और तीव्र ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. इसकी उपासना आत्म-नवीनीकरण, आध्यात्मिक जागरण और आंतरिक शक्ति को मजबूत करने में सहायक मानी जाती है.

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धनु- काशी विश्वनाथ

    वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मोक्ष और ज्ञान का प्रतीक है. इसकी पूजा से वैराग्य की भावना जागृत होती है और उच्च आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.

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मकर- भीमाशंकर धाम

    महाराष्ट्र का भीमाशंकर कर्तव्य और धैर्य से जुड़ा है. इसकी आराधना से अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के माध्यम से सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है.

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कुंभ- केदारनाथ धाम

    उत्तराखंड स्थित केदारनाथ उच्च दर्शन और वैराग्य का प्रतीक है. इसकी पूजा से गहन ध्यान, आत्मचिंतन और जीवन के उच्च उद्देश्य की अनुभूति प्राप्त होती है.

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मीन- त्र्यंबकेश्वर मंदिर

    महाराष्ट्र का त्र्यंबकेश्वर पवित्र जल और उपचारात्मक शक्ति से जुड़ा है. इसकी उपासना से भावनाओं की शुद्धि, ग्रह दोषों में कमी और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति मानी जाती है.

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