क्या सच में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में धड़कता है 'ब्रह्म पदार्थ'? रथ यात्रा से पहले जानिए बड़ा रहस्य
मूर्तियों के भीतर छिपा रहस्यमयी 'ब्रह्म पदार्थ'
भगवान जगन्नाथ की नई मूर्ति बनते समय पुरानी मूर्ति से एक पवित्र 'ब्रह्म पदार्थ' नई मूर्ति में स्थापित किया जाता है. इसे लेकर कई धार्मिक मान्यताएं हैं और इसे मंदिर की सबसे गोपनीय परंपराओं में से एक माना जाता है.
Credit: AI Generatedमूर्ति परिवर्तन की रस्म
नवकलेवर के दौरान ब्रह्म पदार्थ को स्थानांतरित करने वाले पुजारियों की आंखों पर पट्टी बांधी जाती है और वे दस्ताने पहनते हैं. यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय तरीके से संपन्न होती है और इससे जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं.
Credit: AI Generatedअधूरी मूर्तियों के पीछे की मान्यता
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां बिना पूर्ण हाथ-पैर के बनाई जाती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने मूर्तियों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया था, जिसके बाद से आज तक यही स्वरूप स्थापित है.
Credit: AI Generatedभगवान की मूर्तियां का निर्माण
मूर्तियों के निर्माण के लिए साधारण नीम का पेड़ नहीं चुना जाता. धार्मिक परंपरा के अनुसार, विशेष गुणों और शुभ संकेतों वाले नीम के वृक्ष (दारु) की खोज की जाती है, तभी उससे भगवान की नई मूर्तियां बनाई जाती हैं.
Credit: AI Generatedहर साल नहीं बदलती भगवान की मूर्तियां
जगन्नाथ मंदिर में मूर्तियां हर वर्ष नहीं बदली जाती. हिंदू पंचांग में जब आषाढ़ का अधिकमास (मलमास) आता है, तभी नवकलेवर की परंपरा निभाई जाती है. यह अवसर कई वर्षों के अंतराल पर आता है.
Credit: AI Generatedरथयात्रा की अनोखी परंपरा
रथयात्रा के दौरान पुरी के गजपति महाराज स्वयं सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करते हैं. यह परंपरा इस संदेश का प्रतीक है कि भगवान के सामने राजा और आम इंसान सभी समान हैं.
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