Mahashivratri 2026: भूत-प्रेतों वाली बारात और सुंदरेश्वर रूप, जानें शिव विवाह की अनसुनी कहानी
अनोखी और अद्भुत बारात
शिवजी की बारात सामान्य नहीं थी. इसमें भूत-प्रेत, पिशाच, अघोरी और नंदी जैसे गण शामिल थे. यह दृश्य देखकर माता पार्वती की माता मैनावती घबरा गई थीं.
Credit: pinterest देवताओं की उपस्थिति
इस दिव्य विवाह में सभी देवी-देवता शामिल हुए. यह आयोजन केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि एक ब्रह्मांडीय उत्सव माना गया.
Credit: pinterest‘सुंदरेश्वर’ रूप में शिव
पार्वती जी के आग्रह पर भगवान विष्णु और अन्य देवताओं ने शिव का दिव्य श्रृंगार किया. इसके बाद वे ‘सुंदरेश्वर’ रूप में विवाह मंडप में पहुंचे.
Credit: pinterestत्रियुगीनारायण में संपन्न हुआ विवाह
उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर में अग्नि को साक्षी मानकर विवाह संपन्न हुआ. मान्यता है कि वहां की पवित्र अग्नि आज भी प्रज्वलित है.
Credit: pinterestब्रह्मा बने पुरोहित
विवाह की मुख्य रस्मों में ब्रह्मा जी ने पुरोहित की भूमिका निभाई और भगवान विष्णु ने माता पार्वती का कन्यादान किया.
Credit: pinterestमहाशिवरात्रि का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, यह दिव्य मिलन महाशिवरात्रि के दिन हुआ था. इसलिए इस दिन व्रत, पूजन और जागरण का विशेष महत्व है.
Credit: pinterestशक्ति और चेतना का मिलन
यह विवाह केवल एक संबंध नहीं, बल्कि शक्ति (पार्वती) और चेतना (शिव) का दिव्य संगम माना जाता है, जो सृष्टि संतुलन का प्रतीक है.
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