Mahashivratri 2026: भूत-प्रेतों वाली बारात और सुंदरेश्वर रूप, जानें शिव विवाह की अनसुनी कहानी


2026/02/15 15:12:08 IST

अनोखी और अद्भुत बारात

    शिवजी की बारात सामान्य नहीं थी. इसमें भूत-प्रेत, पिशाच, अघोरी और नंदी जैसे गण शामिल थे. यह दृश्य देखकर माता पार्वती की माता मैनावती घबरा गई थीं.

Credit: pinterest

देवताओं की उपस्थिति

    इस दिव्य विवाह में सभी देवी-देवता शामिल हुए. यह आयोजन केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि एक ब्रह्मांडीय उत्सव माना गया.

Credit: pinterest

‘सुंदरेश्वर’ रूप में शिव

    पार्वती जी के आग्रह पर भगवान विष्णु और अन्य देवताओं ने शिव का दिव्य श्रृंगार किया. इसके बाद वे ‘सुंदरेश्वर’ रूप में विवाह मंडप में पहुंचे.

Credit: pinterest

त्रियुगीनारायण में संपन्न हुआ विवाह

    उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर में अग्नि को साक्षी मानकर विवाह संपन्न हुआ. मान्यता है कि वहां की पवित्र अग्नि आज भी प्रज्वलित है.

Credit: pinterest

ब्रह्मा बने पुरोहित

    विवाह की मुख्य रस्मों में ब्रह्मा जी ने पुरोहित की भूमिका निभाई और भगवान विष्णु ने माता पार्वती का कन्यादान किया.

Credit: pinterest

महाशिवरात्रि का महत्व

    पौराणिक कथा के अनुसार, यह दिव्य मिलन महाशिवरात्रि के दिन हुआ था. इसलिए इस दिन व्रत, पूजन और जागरण का विशेष महत्व है.

Credit: pinterest

शक्ति और चेतना का मिलन

    यह विवाह केवल एक संबंध नहीं, बल्कि शक्ति (पार्वती) और चेतना (शिव) का दिव्य संगम माना जाता है, जो सृष्टि संतुलन का प्रतीक है.

Credit: pinterest

View More Web Stories