जानिए अर्जुन को कैसे मिला गांडीव धनुष और अक्षय तरकश


महाभारत युद्ध

    महाभारत युद्ध में अर्जुन ने अपने धनुष गांडीव से कौरवों के हजारो सेना को परास्त किया था.

गांडीव धनुष खासियत

    गांडीव धनुष की ये खासियत थी इसे अर्जुन के सिवा कोई और नहीं उठा सकता था और तरकश की तीर भी खत्म नहीं हो सकती थी.

खांडव वन

    दरअसल, पांडवों और कौरवों के बीच राज्य के बंटवारे की कलह के बाद धृतराष्ट्र ने पांडवों को कुछ समय के लिए खांडव वन दे दिया.

अर्जुन श्री कृष्ण

    खांडव वन जाने के बाद अर्जुन श्री कृष्ण से कहते हैं कि, हम इसे राजधानी कैसे बना पाएंगे. जिसके बाद श्री कृष्ण विश्वकर्मा का आह्वान करते हैं.

श्री कृष्ण

    विश्वकर्मा प्रकट होते हैं और कहते हैं कि, इस वन को मयासुर ने बसाया है आप उनसे ही राजधानी बनवाएं तो अच्छा होगा. विश्वकर्मा की बात सुनकर श्री कृष्ण मयासुर का स्मरण करते हैं.

सोने का रथ

    जिसके बाद मयासुर उन्हें खंडहर में ले जाते हैं. वहां एक सोने का रथ मिलता है.मयासुर कहता है यह महाराजा सोम का था. आप इसे जहां चाहे ले जा सकते हैं.

गांडीव धनुष

    उसने आगे कहा कि. इस रथ में एक कौमुद गदा है जिसे भीम के अलावा कोई और नहीं उठा सकता और गांडीव धनुष भी है जो दिव्य है.

अक्षय तरकश

    मयासुर ने अर्जुन को एक अक्षय तरकश भी दिया और कहा कि, इसके बाण खत्म नहीं होंगे. इसी तरह अर्जुन को गांडीव मिला.

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