सूझबूझ ऐसी कि मुग़ल बादशाह को दिया चकमा, क़ैद से ऐसे आजाद हुए शिवाजी!


2024/03/03 12:53:53 IST

औरंगजेब का निमंत्रण

    एक दिन शिवाजी को चिट्ठी मिली, जिसमें उन्हें औरंगजेब के दरबार में आने का निमंत्रण मिला.

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शिवाजी को हुई गलतफहमी

    शिवाजी को लगा कि शायद मुलाकात के बाद वो उन्हें दक्कन में अपना वायसराय बनाने की घोषणा करेंगे.

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जयपुर सराय में ठहराया गया

    जब वो मिलने गए तो बादशाह ने उन्हें आगरा शहर से बाहर जयपुर सराय में ठहराने का आदेश जारी किया. मुगल सैनिक चुपचाप इनकी निगरानी करने में जुट गए.

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औरंगजेब की चाल समझ गए

    बादशाह के आदेश में शिवाजी को भवन नहीं छोड़ने की बात कही गई थी. शिवाजी औरंगजेब की मंशा को समझ गए थे, और औरंगजेब ने उनको कैद कर लिया.

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खुश रहते थे शिवाजी

    हालात को समझते हुए शिवाजी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया. वो मायूस होने की जगह खुश रहने लगे. शिवाजी ने सैनिकों के लिए खाने-पीने की चीजें भिजवानी शुरू की.

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दर्द का बहाना

    नतीजा, शुरुआती कुछ दिनों के बाद इनसे मिलने वालों की तलाशी लेनी बंद कर दी गई. एक दिन शिवाजी ने दर्द का बहाना बनाया, वो इतना तेज कराहने लगे कि आवाजें महल के बाहर खड़े सैनिकों को सुनाई देनी लगी.

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टोकरी में बैठकर निकले बाहर

    इस दौरान भी वो बड़े-बड़े संदूक और टोकरियों में फल और खाने-पीने की चीजें बाहर भिजवाने लगे थे. इसी का फायदा उठाते हुए तलाशी ना होने की वजह से वो टोकरी में बैठे और उनके अर्दलियों ने उन्हें बाहर निकाल गए.

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अपनी जगह भाई को लिटाया

    शिवाजी ने बिस्तर पर अपनी जगह सौतेले भाई हीरोजी फरजांद को लिटा दिया. वह डेढ़ दिन तक ऐसे ही लेटे रहे.

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