पूरे देश में क्यों बिखेरी गई थी नेहरू की अस्थियों की भस्म? पढ़िए पूरा किस्सा

Jawahar Lal Nehru: आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन 27 मई, 1964 को हार्ट अटैक से हुआ था, लेकिन 11 जून का दिन भी उन्हीं से जुड़ा है. इस दिन उनकी अस्थियों की भस्म खेतों में बिखेरी गई थी.

JBT Desk
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Jawahar Lal Nehru: देश के इतिहास में जवाहर लाल नेहरू का जिक्र बड़े पैमाने पर मिलता है. उनसे जुड़े करई किस्से हम तक पहुंचते हैं, वो किस तरह से अपनी जिंदगी जिए, उनके क्या उसूल थे, सभी पर खिलकर बात की जाती है. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं नेहरू से जुड़ा इतिहास का वो किस्सा जिसमें उन्होंने अपनी आखिरी इच्छा जाहिर की थी. आखिर नेहरू क्यों चाहते थे कि उनके मरने के बाद उनकी अस्थियों को देश के अलग अलग हिस्सों में बिखेर दिया जाए? 

नेहरू की मौत कैसे हुई? 

27 मई 1964 में को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 74 साल की उम्र में निधन हो गया था. दोपहर करीब 2 बजे उनके निधन की खबर सबको दी गई. पंडित नेहरू की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी. उनकी मौत के बाद एक उनका अंतिम संस्कार कैसे किया जाएगा इसका जिक्र नेहरू ने अपनी संपत्ति के अलावा अपनी वसीयत में भी किया था. 

नेहरू
 

जवाहर लाल नेहरू की आखिरी इच्छा क्या थी? 

मौत से पहले जवाहरलाल नेहरू ने अपनी वसीयत लिखी, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के बाद किए जाएने वाले संस्कारों के बारे में लिखा. उनका कहना था कि ''मैं ऐसे किसी भी अनुष्ठान में भरोसा नहीं करता हूं. मेरी मौत के बाद ऐसा करना एक तरह से पाखंड ही होगा. ऐसा करना खुद को और बाकी लोगों को धोखा देने के समान होगा.'' वसीयत में लिखे उनके शब्द थे कि ''जब मैं मर जाऊं, तो मैं चाहूंगा कि मेरे शरीर का अंतिम संस्कार किया जाए, अगर मैं विदेश में मर जाऊं तो मेरे शरीर का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए और भस्म को इलाहाबाद लाया जाए.''

'खेतों में प्लेन से बिखेरी जाए भस्म'

पंडित नेहरू की ख्वाहिश थी कि मरने करने के बाद उनका अंतिम संस्कार हो लेकिन उनकी अस्थियां उनके देश वापस आएं. नेहरू ने कहा था कि ''उनकी अस्थियों को किसी प्लेन से लेकर देशभर के खेतों में बिखेर दिया जाए. उनका ये करने का मकसद था किसानों से और देश से प्यार. नेहरू का मानना था कि ऐसा करने से उनकी राख धूल और मिट्टी में मिलकर भारत की जमीन का खास हिस्सा बनी रहेगी. इससे वो मरने के बाद भी अपने देश से जुड़े रहेंगे.

इस बात का जिक्र 11 जून को करने की खास वजह ये है कि आज ही के दिन उनकी अस्थियों की राख को देश के खेतों की मिट्टी और गंगा में मिला दिया गया था.

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11 June 2024, 09:53 AM IST

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