NEET UG री-एग्जाम में बड़ा खुलासा, बिहार में पकड़ा गया सॉल्वर गैंग; मेडिकल छात्रों समेत 24 आरोपी गिरफ्तार

NEET UG री-एग्जाम के दौरान बिहार में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक कथित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया गया है. इस कार्रवाई में मेडिकल छात्रों से लेकर बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों तक कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: NEET UG री-एग्जाम के दौरान बिहार से परीक्षा में गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है. लखीसराय जिले में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक कथित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया गया है. इस कार्रवाई में मेडिकल छात्रों से लेकर बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों तक कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने के लिए लाखों रुपये का लेन-देन किया गया था.

पुलिस और जिला प्रशासन ने लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर कार्रवाई करते हुए कुल 24 लोगों को हिरासत में लिया है. गिरफ्तार आरोपियों में 7 कथित सॉल्वर शामिल हैं, जबकि 14 लोग उस कंपनी के कर्मचारी बताए जा रहे हैं जो परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य कर रही थी. जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की तैयारी की गई थी. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए प्रति उम्मीदवार करीब 30 लाख रुपये तक की डील की गई थी.

मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया मेडिकल छात्र

जांच के दौरान जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह अर्पित राज का है. अधिकारियों के अनुसार, अर्पित गया मेडिकल कॉलेज का छात्र है और उसे इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि उसका नाम पहले भी एक चर्चित परीक्षा विवाद में सामने आ चुका है. ऐसे में एक बार फिर किसी परीक्षा से जुड़े मामले में उसका नाम सामने आने से जांच एजेंसियां उसकी भूमिका को गंभीरता से देख रही हैं.

ऐसे खुली पूरे गिरोह की परतें

पुलिस के मुताबिक मामले का खुलासा एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों के कारण हुआ. हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप को परीक्षा केंद्र में संदिग्ध परिस्थिति में देखा गया था. जांच में पता चला कि वह कथित रूप से बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में पहुंचा था. अधिकारियों को उसकी मौजूदगी पर शक हुआ, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अन्य परीक्षा केंद्रों पर भी कार्रवाई की, जहां से कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया.

मेडिकल और नर्सिंग छात्र भी जांच के घेरे में

जांच के दौरान कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं जो मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा से जुड़े हुए हैं. जानकारी के अनुसार, बीएचयू में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही पूनम कुमारी एक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंची थी. इसके अलावा रायबरेली एम्स के छात्र सौरभ झा, एनएमसीएच पटना के छात्र संजीत और उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज के छात्र अमन अग्रवाल का नाम भी जांच में सामने आया है. अधिकारियों का कहना है कि इन सभी की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है.

पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं. शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि यह मामला केवल एक जिले या एक राज्य तक सीमित नहीं हो सकता. अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह का संपर्क दूसरे राज्यों तक भी हो सकता है. इसी वजह से मामले की जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है. फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा में कथित धांधली की योजना कितने बड़े स्तर पर बनाई गई थी.

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