दिल्ली-NCR में भीषण लू का अलर्ट! जानिए कितनी खतरनाक होगी ये गर्मी? बाहर निकलना पड़ सकता है भारी
थार रेगिस्तान से आने वाली सूखी और गर्म उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने दिल्ली-एनसीआर में पारे को 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचा दिया है. इस समय दिल्ली- एनसीआर आग की भट्टी बन गया है.

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली समेत पूरा उत्तर और मध्य भारत इस समय आग की भट्टी बना हुआ है. थार रेगिस्तान से आने वाली सूखी और गर्म उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने दिल्ली-एनसीआर में पारे को 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचा दिया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है.
सिवियर हीटवेव की कड़ी चेतावनी
बता दे कि आने वाले दिनों में 'सिवियर हीटवेव' की कड़ी चेतावनी दी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सामान्य हीटवेव और सिवियर हीटवेव में क्या अंतर होता है, और मौसम विभाग के इन कलर-कोडेड अलर्ट्स का आपके शरीर पर क्या असर पड़ सकता है?
सामान्य हीटवेव बनाम सिवियर हीटवेव
मौसम विज्ञान के नियमों के अनुसार, मैदानी इलाकों में हीटवेव की स्थिति तब मानी जाती है जब किसी स्थान का अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है. इसे दो पैमानों पर मापा जाता है. यह स्थिति तब घोषित होती है जब किसी इलाके का अधिकतम तापमान वहां के सामान्य औसत तापमान से 4.5°C से 6.4°C तक अधिक हो जाता है. यदि पारा सीधे 45°C से 46.9°C के बीच पहुंच जाए तो भी इसे सामान्य हीटवेव माना जाता है.
सिवियर हीटवेव या भीषण लू
यह बेहद खतरनाक स्थिति होती है. जब किसी क्षेत्र का तापमान वहां के सामान्य औसत से 6.5°C या उससे भी अधिक बढ़ जाता है, तो उसे भीषण लू कहा जाता है. इसके अलावा, यदि मैदानी इलाकों में पारा सीधे 47°C या उससे ऊपर निकल जाए तो इसे सिवियर हीटवेव घोषित किया जाता है. इस दौरान हवा इतनी गर्म और शुष्क होती है कि वह त्वचा को झुलसाने लगती है.
क्या है ऑरेंज और रेड अलर्ट का असल मतलब?
आईएमडी (IMD) मौसम की गंभीरता के आधार पर चार रंगों के अलर्ट जारी करता है. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में जारी अलर्ट्स का सीधा प्रशासनिक और व्यावहारिक मतलब इस प्रकार है. ऑरेंज अलर्ट का अर्थ है कि क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी का प्रकोप बना हुआ है और तापमान 44-46°C के बीच रहेगा.
अस्पतालों को अलर्ट का आदेश
यह अलर्ट प्रशासन को बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने और अस्पतालों को हीटस्ट्रोक के मरीजों के लिए तैयार रहने का निर्देश देता है. आम जनता के लिए इसका मतलब दोपहर के समय बाहर न निकलना है. रेड अलर्ट का मतलब है कि भीषण लू अपने चरम पर है और यह स्थिति लगातार दो या तीन दिनों तक बनी रह सकती है. यह सभी उम्र के लोगों के लिए एक 'हेल्थ इमरजेंसी' जैसी स्थिति होती है.
हमारे शरीर पर कैसा हो सकता है असर?
उच्च तापमान के कारण मानव शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर सकता है. सिवियर हीटवेव की स्थिति में शरीर का तापमान अचानक 104°F या उससे ऊपर पहुंच सकता है जिसे 'हीट स्ट्रोक' कहते हैं. यह एक जानलेवा स्थिति है जो चक्कर आना, मतली, तेज सिरदर्द और अंगों के फेल होने का कारण बन सकती है. डॉक्टर इस मौसम में खुद को हाइड्रेटेड रखने और केवल आपातकालीन स्थिति में ही धूप में निकलने की सलाह देते हैं.


