‘ग्रे-जोन’ से ‘ओपन कॉन्फ्लिक्ट’ तक... पहलगाम हमले के बाद भारत ने बदली अपनी डिफेंस पॉलिसी
पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है. अब इसे युद्ध की तरह देखते हुए कई सख्त कदम उठाए गए हैं, जिनका असर सुरक्षा से लेकर कूटनीति तक दिख रहा है.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने देश की सुरक्षा नीति को एक नई दिशा दे दी. इस घटना के बाद भारत ने आतंकवाद को लेकर अपनी सोच और रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अब इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे ‘युद्ध’ के रूप में देखा जा रहा है. इसी नई सोच के तहत भारत ने सुरक्षा और कूटनीति से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं, जो भविष्य में देश की नीति को तय करेंगे.
‘ऑपरेशनल प्री-एम्प्शन’ की नई नीति
नई रणनीति के तहत भारत अब किसी हमले का इंतजार नहीं करता. अगर खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी मिलती है कि सीमा पार आतंकी ठिकाने सक्रिय हैं, तो भारत उन्हें पहले ही निशाना बना सकता है. इसे ‘ऑपरेशनल प्री-एम्प्शन’ कहा जा रहा है. पहलगाम हमले के बाद चलाया गया ऑपरेशन ‘सिंदूर’ इसी सोच का पहला बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें पहले से कार्रवाई कर खतरे को खत्म करने की कोशिश की गई.
‘ग्रे-जोन’ से ‘ओपन कॉन्फ्लिक्ट’ तक
अब तक पाकिस्तान पर आरोप था कि वह सीधे युद्ध के बजाय ‘छद्म युद्ध’ के जरिए भारत को नुकसान पहुंचाता रहा है. लेकिन नई नीति के तहत भारत ने इस रणनीति को ‘ग्रे-ज़ोन’ से निकालकर खुले संघर्ष की श्रेणी में रख दिया है. इसका मतलब यह है कि अब जवाब सिर्फ आतंकियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन ताकतों को भी निशाना बनाया जाएगा जो उन्हें समर्थन देती हैं. इसमें आर्थिक और कूटनीतिक दबाव जैसे कदम भी शामिल हैं.
कूटनीतिक स्तर पर सख्त रुख
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साफ संदेश दिया है कि आतंकवाद को समर्थन देना किसी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा है. इसी वजह से पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं. भारत ने कई द्विपक्षीय बातचीत और समझौतों को फिलहाल रोक दिया है और उन्हें ‘युद्धकालीन नियमों’ के तहत रखा है. इससे यह संकेत गया है कि अब बातचीत से ज्यादा प्राथमिकता सुरक्षा को दी जाएगी.
नागरिक सुरक्षा को मिली नई अहमियत
पहलगाम में हुआ हमला पर्यटकों को निशाना बनाकर किया गया था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए. इसके बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पर्यटन स्थलों की सुरक्षा को और मजबूत कर दिया है. अब केवल स्थानीय पुलिस ही नहीं, बल्कि विशेष रूप से प्रशिक्षित सैन्य इकाइयों को भी जिम्मेदारी दी गई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा किसी सैन्य क्षेत्र जैसी मजबूत हो.
आर्थिक मोर्चे पर सख्ती
भारत ने आतंकवाद को युद्ध मानते हुए आर्थिक स्तर पर भी कड़े कदम उठाए हैं. इसी सोच के तहत पाकिस्तान के साथ व्यापार को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. यह कदम इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब दो देशों के बीच तनाव युद्ध जैसा हो, तो आर्थिक संबंध बनाए रखना सही नहीं होता.


