भारतीय सेना ने अरुणाचल में चीनी घुसपैठ की खबरों को बताया 'निराधार'
दरअसल कई लोकल मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया था कि पिछले छह सालों में PLA के सैनिकों ने ऊपरी सुबनसिरी जिले में घुसपैठ की है। ये खबरें 'नाह' आदिवासी समुदाय के दावों पर आधारित थीं।

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA के सैनिकों की घुसपैठ वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। सेना ने साफ कहा कि ये रिपोर्ट 'गलत' हैं और इनका 'कोई आधार नहीं' है।
सेना का बयान: मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सेना ने अपने बयान में कहा, "हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट देखी हैं जिनमें अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA द्वारा हाल ही में घुसपैठ करने और कैंप लगाने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्ट गलत हैं और इनका कोई आधार नहीं है।"
दरअसल कई लोकल मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया था कि पिछले छह सालों में PLA के सैनिकों ने ऊपरी सुबनसिरी जिले में घुसपैठ की है। ये खबरें 'नाह' आदिवासी समुदाय के दावों पर आधारित थीं। समुदाय का कहना था कि घुसपैठ के कारण उन्हें अपने मवेशी चराने में दिक्कत हो रही है।
नाह वेलफेयर सोसाइटी का दावा: 2020 से कब्जे में हैं इलाके
नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा कि चीनी सैनिकों ने उनकी 'पुश्तैनी ज़मीन' और शिकार वाले इलाकों पर कब्जा कर लिया है। चाडर का दावा है कि 2020 से ही कई इलाके चीनी कब्जे में हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है। चाडर के मुताबिक सेना ने सालों से उनकी जमीन की रक्षा की है।
गलवान झड़प के बाद सुधरे हालात, LAC पर स्थिरता
2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन के रिश्तों में तनाव आया था। उस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे। चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे, लेकिन बीजिंग ने कभी आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया।
हालांकि अब हालात काफी बेहतर हैं। दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत हो रही है। सोमवार को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि गलतफहमी दूर करने के लिए जमीनी स्तर पर 1,100 से ज्यादा बार बातचीत हो चुकी है।
सेना प्रमुख बोले: ताकत के जरिए शांति हमारा नजरिया
जनरल द्विवेदी ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर स्थिति स्थिर है। उन्होंने दोहराया कि भारतीय सेना चीन के साथ बातचीत और संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा, "सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत ने शांति और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन हमारा नजरिया 'ताकत के जरिए शांति' पर आधारित है।" उन्होंने आगे कहा कि LAC पर भारतीय सेना का रुख मजबूत, भरोसेमंद और सतर्क है। सेना भारत की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।


