आज तय होगा चंपत राय का भविष्य, राम मंदिर दान चोरी मामले में क्या सिर्फ पद जाएगा या ट्रस्ट से भी होंगे बेदखल?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच आज, यानी सोमवार को ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक होने जा रही है. दोपहर तीन बजे होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा और उनके भविष्य का निर्धारण करना है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

लखनऊ: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों से लेकर संतों के बीच हलचल बेहद तेज हो गई है. इस गंभीर विवाद के बीच आज, यानी सोमवार को ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक होने जा रही है. दोपहर तीन बजे होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा और उनके भविष्य का निर्धारण करना है.

चंपत राय के पक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस

विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार से जुड़े कई वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी चंपत राय को प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही का दोषी भले मान रहे हों, लेकिन वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से निर्दोष और बेकसूर मान रहे हैं. शनिवार को अयोध्या के संत समाज ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और खुलकर चंपत राय के समर्थन में मोर्चा खोल दिया. संतों का तर्क है कि दशकों तक राम मंदिर आंदोलन और इसके निर्माण में समर्पित रहे चंपत राय के खिलाफ यह एक बड़ी प्रशासनिक साजिश है. ट्रस्ट कोई भी अंतिम फैसला बहुमत के आधार पर ही करेगा. 

राम मंदिर ट्रस्ट की साख दांव पर

ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में यह तय होगा कि क्या दोनों पदाधिकारियों को केवल उनके पदों से मुक्त किया जाएगा या फिर उन्हें पूरी तरह ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. हालांकि, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो चंपत राय का महासचिव पद से इस्तीफा स्वीकार कर उन्हें एक सामान्य सदस्य के तौर पर ट्रस्ट में बनाए रखने की संभावना अधिक दिख रही है.

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम

राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है जब किसी बैठक को लेकर इस स्तर के कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. अयोध्या आने वाले सभी ट्रस्ट सदस्यों के ठहरने के स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है. बैठक स्थल और उसके चारों ओर लगभग दो सौ मीटर के दायरे को पूरी तरह सुरक्षित घेरे में तब्दील कर दिया गया है,जहां आम जनता या किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है.

मीडिया पर पाबंदी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. गौरव ग्रोवर और जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने खुद सुरक्षा व्यवस्थाओं का मुआयना किया है. स्थानीय निवासियों के अनुसार, हर चार महीने में होने वाली रूटीन बैठकों में ऐसा सुरक्षा घेरा कभी नहीं देखा गया. इस बार मीडिया को बैठक की कवरेज से पूरी तरह दूर रखने की रणनीति बनाई गई है. बैठक के निर्णयों की जानकारी बाद में एक आधिकारिक प्रेस रिलीज या पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो के माध्यम से जारी की जा सकती है.

नृपेन्द्र मिश्र का बदला कार्यक्रम

दूसरी तरफ, भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र के रविवार के कार्यक्रम में अचानक बदलाव हो गया और उनका विमान तय समय पर नहीं पहुंचा, जिससे उन्हें रिसीव करने गई गाड़ी खाली लौट आई. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केशव पराशरण और केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधि इस बेहद संवेदनशील बैठक में वर्चुअली जुड़कर अपनी राय रखेंगे.

प्रमुख संतों का जमावड़ा

बैठक में हिस्सा लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से ट्रस्टियों के अयोध्या पहुंचने का सिलसिला रविवार से ही शुरू हो गया. स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती शनिवार रात को ही अयोध्या पहुंच गए थे और उन्हें महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के गेस्ट हाउस में भारी सुरक्षा के बीच ठहराया गया है. साध्वी ऋतम्भरा के गुरु दंडी स्वामी युगपुरुष परमानंद भी अयोध्या आ चुके हैं, जिन्हें रामसेवक पुरम के एक विशेष ब्लॉक में काफी गोपनीय तरीके से रखा गया है. कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और उडुपी के पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ भी बैठक की कार्यवाही में भौतिक रूप से शामिल हो रहे हैं.

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