क्या खत्म होने जा रहा है अमेरिका-ईरान का सबसे बड़ा टकराव? ट्रंप ने किया ऐतिहासिक समझौते का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव जल्द खत्म हो सकता है और इस सप्ताहांत एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब खत्म होने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इस सप्ताहांत यूरोप में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो यह मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.

समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि समझौते से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले कुछ दिनों में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी. ट्रंप के अनुसार, ईरान भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखा रहा है और दोनों पक्ष संघर्ष समाप्त करने के इच्छुक हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद

ट्रंप ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलने की उम्मीद है.

ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस प्रस्तावित समझौते पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के प्रस्तावित मसौदे को स्वीकार करने के बाद समझौते को मंजूरी मिलने की संभावना पहले से अधिक मजबूत हो गई है.

नेतन्याहू और ट्रंप के बीच हुई चर्चा

इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रंप से फोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं ने अमेरिका-ईरान समझौते के संभावित प्रभावों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को अंतिम समझौते में शामिल करने का भरोसा दिया है.

सैन्य कार्रवाई भी रोकी गई

गौरतलब है कि ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य हमलों को भी रद्द करने का ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि बातचीत में हुई प्रगति और सकारात्मक संकेतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया. अब दुनिया की नजरें इस संभावित ऐतिहासिक समझौते पर टिकी हैं, जो क्षेत्र में शांति की नई शुरुआत कर सकता है.

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