पर्दे के पीछे कौन चला रहा है ईरान की सत्ता? सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को करवानी पड़ सकती है प्लास्टिक सर्जरी

ईरान के शीर्ष नेता गंभीर चोटों के बाद सार्वजनिक रूप से गायब हैं और गुप्त तरीके से काम कर रहे हैं. इस बीच सेना का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे सत्ता के संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.

Shraddha Mishra

ईरान की सत्ता में इस समय उथल पुथल चल रही है. देश का सर्वोच्च नेता जीवित और सक्रिय तो है, लेकिन अब वह पहले की तरह सामने नहीं आ रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने पिता की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और अब बेहद सीमित तरीके से काम कर रहे हैं. वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहे और ज्यादातर समय छिपकर ही फैसले ले रहे हैं. हालांकि, इन गंभीर चोटों के बावजूद उनका मानसिक संतुलन और सोचने की क्षमता पूरी तरह मजबूत बनी हुई है. ईरान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे अभी भी फैसले लेने में सक्षम हैं और स्थिति को समझते हैं.

बताया जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई की शारीरिक स्थिति काफी खराब रही है. उनके पैर की कई बार सर्जरी हो चुकी है और उन्हें कृत्रिम पैर की जरूरत है. उनके एक हाथ का भी ऑपरेशन हुआ है और उसकी ताकत धीरे-धीरे वापस आ रही है. इसके अलावा, उनके चेहरे और होंठ भी बुरी तरह झुलस गए हैं, जिससे उन्हें बोलने में दिक्कत होती है. डॉक्टरों के अनुसार, आगे चलकर उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है.

सार्वजनिक रूप से गायब रहने की रणनीति

सत्ता संभालने के बाद से मोजतबा खामेनेई ने कोई सार्वजनिक भाषण या संदेश जारी नहीं किया है. यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, वे इस समय खुद को कमजोर या असहाय दिखाना नहीं चाहते. इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से सामने आने से दूरी बना ली है, ताकि उनकी छवि मजबूत बनी रहे.

गुप्त तरीके से हो रहा संवाद

खामेनेई का संवाद करने का तरीका भी अब पूरी तरह बदल गया है. अब उनके पास संदेश सीधे नहीं पहुंचते. इसके बजाय, संदेश हाथ से लिखे जाते हैं, उन्हें लिफाफों में बंद किया जाता है और फिर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हुए उनके ठिकाने तक भेजा जाता है. यह पूरी प्रक्रिया एक तरह की मानव श्रृंखला के जरिए होती है, जिसमें कार और मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया जाता है. उनके जवाब भी इसी तरह वापस भेजे जाते हैं. यह तरीका दिखाता है कि सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है.

यहां तक कि ईरान के वरिष्ठ अधिकारी भी उनसे सीधे मिलने से बच रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर वे खामेनेई के पास गए, तो उनकी लोकेशन का पता चल सकता है और इससे बड़ा खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए मुलाकातों को सीमित कर दिया गया है और ज्यादातर बातचीत अप्रत्यक्ष तरीके से ही हो रही है.

सेना के हाथ में बढ़ी ताकत

खामेनेई की सीमित पहुंच और धीमी संचार प्रक्रिया के कारण अब सत्ता का संतुलन बदल गया है. फैसले लेने की ताकत धीरे-धीरे सेना के हाथों में चली गई है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर के कमांडर अब युद्ध, कूटनीति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में ज्यादा प्रभावी हो गए हैं. वे मिलकर फैसले ले रहे हैं और देश की दिशा तय कर रहे हैं. पूर्व सलाहकार अब्दोलरेज़ा दावरी के अनुसार, मोजतबा खामेनेई अब एक तरह से बोर्ड के चेयरमैन की तरह काम कर रहे हैं, जबकि जनरल उस बोर्ड के सदस्य हैं जो मिलकर निर्णय लेते हैं.

बदली हुई सत्ता व्यवस्था

विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव ईरान की पुरानी व्यवस्था से काफी अलग है. पहले जहां एक व्यक्ति के हाथ में पूरी ताकत होती थी, अब वही शक्ति कई लोगों में बंटती नजर आ रही है. हालांकि अंतिम मंजूरी अभी भी सर्वोच्च नेता की होती है, लेकिन असली निर्णय लेने की प्रक्रिया अब सामूहिक हो गई है.

इस बदलते हालात का असर ईरान की राजनीति पर भी पड़ा है. देश के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नेताओं की भूमिका सीमित हो गई है. वे अब मुख्य रूप से देश के अंदरूनी मामलों पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि बड़े रणनीतिक फैसले सेना के हाथ में चले गए हैं.

अमेरिका के साथ बातचीत पर असर

इस सत्ता बदलाव का असर ईरान की विदेश नीति पर भी साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत का एक अहम दौर रद्द हो गया. बताया गया कि अमेरिकी नौसैनिक दबाव के बीच सेना के अधिकारियों ने बातचीत का विरोध किया. इसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. ईरान के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए, लेकिन आखिरकार सेना की राय को प्राथमिकता दी गई और वार्ता ठप हो गई.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही यह संकेत दिया हो कि इस पूरे घटनाक्रम से सत्ता में बदलाव आ गया है, लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग है. ईरान की व्यवस्था अभी भी बनी हुई है, लेकिन उसका स्वरूप बदल गया है. सत्ता खत्म नहीं हुई है, बल्कि उसका तरीका और नियंत्रण बदल गया है.

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