भारत के ब्रह्मोस और आकाशतीर पर आया UAE का दिल, जल्द हो सकती है बड़ी डील!

सूत्रों का कहना है कि UAE ने कई भारतीय हथियार प्रणालियों में दिलचस्पी दिखाई है। बातचीत अभी शुरुआती दौर में है लेकिन काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत और UAE सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बाद संयुक्त अरब अमीरात अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुट गया है। सूत्रों के मुताबिक भारत और UAE के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई को लेकर बातचीत चल रही है।  

सुरक्षा जरूरतों के चलते बढ़ी दिलचस्पी   

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष के दौरान UAE को मिसाइल और ड्रोन खतरों का सामना करना पड़ा था। इसके बाद अबू धाबी अपनी डिफेंस खरीद नीति पर दोबारा काम कर रहा है। खासतौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बढ़ाना उसकी प्राथमिकता है, क्योंकि इसी रास्ते से उसके ऊर्जा निर्यात का बड़ा हिस्सा जाता है।  

सूत्रों का कहना है कि UAE ने कई भारतीय हथियार प्रणालियों में दिलचस्पी दिखाई है। बातचीत अभी शुरुआती दौर में है लेकिन काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत और UAE सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  

ब्रह्मोस और आकाशतीर पर फोकस   

ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के सहयोग से बनी है और इसे दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिना जाता है। इसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है और इसकी निर्यात रेंज करीब 290 किलोमीटर है। चूंकि यह रूस के साथ संयुक्त प्रोजेक्ट है, इसलिए UAE को एक्सपोर्ट के लिए मॉस्को की मंजूरी भी लेनी होगी। हालांकि सूत्रों का मानना है कि रूस और UAE के अच्छे संबंधों को देखते हुए इसमें दिक्कत नहीं आएगी।  

वहीं आकाशतीर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारतीय सेना द्वारा विकसित पूरी तरह ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कमांड सिस्टम है। यह अलग-अलग सेंसर और हथियार प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी को प्रोसेस कर हवाई खतरों पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सिस्टम मौजूदा मिसाइल डिफेंस सेटअप को और मजबूत बनाता है।  

सप्लायर्स में विविधता लाना चाहता है UAE  

UAE पहले से ही अमेरिका के THAAD, पैट्रियट और ATACMS जैसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन अब वह अपने सप्लायर्स में विविधता लाना चाहता है ताकि रणनीतिक रूप से ज्यादा स्वतंत्र हो सके। इस साल की शुरुआत में UAE ने दक्षिण कोरिया के साथ 35 बिलियन डॉलर का डिफेंस समझौता भी किया था।  

विश्लेषकों का मानना है कि भारत के साथ करीबी डिफेंस सहयोग UAE को रणनीतिक संतुलन देता है। साथ ही अमेरिका को भी इससे कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि भारत और UAE दोनों ही उसके करीबी सहयोगी हैं।  

भारत के लिए यह डील सिर्फ कारोबार नहीं बल्कि पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने का मौका है। पिछले कुछ सालों में भारत और UAE ने व्यापार, ऊर्जा और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में कई समझौते किए हैं।  

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