7 सर्कुलर रोड होगा नीतीश कुमार का नया पता, सीएम हाउस से सामान हो रहा शिफ्ट
नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य बनने के बाद दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के संकेत दिए हैं, जिससे उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं. उन्होंने सीएम आवास खाली करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिससे बिहार में जल्द नेतृत्व परिवर्तन की संभावना बढ़ गई है.

बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की ओर बढ़ चुके हैं. उन्होंने हाल ही में बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और इसके बाद संसद के उच्च सदन राज्य सभा के सदस्य के रूप में शपथ भी ले ली है. इस नई पारी के साथ ही यह संकेत साफ हो गया है कि उनके मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं.
औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से नहीं दिया इस्तीफा
हालांकि अभी उन्होंने औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उससे जुड़ी तैयारियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं. इसका सबसे बड़ा संकेत उनके आधिकारिक आवास को खाली करने की प्रक्रिया से मिला है. पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास से उनका सामान अब दूसरे सरकारी बंगले में स्थानांतरित किया जा रहा है. यह बदलाव केवल निवास का नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक भूमिका में हो रहे परिवर्तन का भी संकेत माना जा रहा है.
जानकारी के अनुसार, उनका सामान जिस नए पते पर भेजा जा रहा है, वह सात सर्कुलर रोड स्थित एक सरकारी आवास है. यह वही स्थान है, जहां वे पहले भी रह चुके हैं. वर्ष 2014 में लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी की हार के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था और सत्ता की कमान जीतन राम मांझी को सौंप दी थी. उस दौरान भी वे पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में इसी आवास में रहने लगे थे.
सूत्रों का क्या कहना है?
सूत्रों का कहना है कि जैसे ही उनके राज्यसभा जाने की चर्चा शुरू हुई, तभी से इस नए आवास को उनके लिए तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी. अब यह पूरी तरह से रहने योग्य बना दिया गया है और उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया भी जारी है.
इस बीच, राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के साथ ही नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं और तेज हो गई हैं. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथों में सौंपी जाती है, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है.


