नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और ईरान के आसपास बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ते हुए 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस तरह तेजी से बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने लगते हैं और अंततः इसका भार आम लोगों की जेब पर पड़ता है.
होरमुज स्ट्रेट केवल समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम कड़ी माना जाता है. दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है.
ईरान से जुड़े युद्ध और तनावपूर्ण हालात के कारण यह महत्वपूर्ण मार्ग लगभग ठप हो गया है. संभावित हमलों के डर से बड़ी टैंकर कंपनियां और जहाज मालिक इस इलाके से अपने जहाज भेजने से बच रहे हैं.
तेल के परिवहन में आई इस बाधा का सीधा असर वैश्विक सप्लाई पर पड़ रहा है. जब सप्लाई चेन प्रभावित होती है और उपलब्धता घटती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं.
तेल बाजार के ताजा आंकड़े इस संकट की गंभीरता को साफ दर्शा रहे हैं. अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसका भाव लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी लगभग 26 प्रतिशत की तेजी आई है और यह करीब 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
वायदा बाजार के इतिहास में साल 1983 के बाद यह एक सप्ताह में दर्ज की गई सबसे बड़ी बढ़त मानी जा रही है. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होरमुज जलमार्ग जल्द सामान्य नहीं हुआ तो यह संकट और गहरा सकता है.
संकट केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि तेल उत्पादन पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है. खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने संभावित जोखिम को देखते हुए उत्पादन और गतिविधियों में बदलाव शुरू कर दिया है.
कुवैत: जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ईरान से मिल रही धमकियों के चलते कुवैत ने एहतियात के तौर पर अपने तेल उत्पादन और रिफाइनरी संचालन में कटौती कर दी है.
इराक: यहां हालात और अधिक चिंताजनक हैं. दक्षिणी तेल क्षेत्रों से होने वाला उत्पादन, जो पहले लगभग 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, अब घटकर करीब 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है. यह लगभग 70 प्रतिशत की भारी गिरावट मानी जा रही है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): अपने तेल भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए UAE ने ऑफशोर उत्पादन को बेहद सावधानी से संचालित करने का निर्णय लिया है. First Updated : Monday, 09 March 2026