Gold Silver Price Crash: सोना-चांदी की किमतों में आई भारी गिरावट, देखें आपके शहर में क्या है आज का रेट

7 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में आई इस नरमी के पीछे कई अहम वजहें हैं. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु समेत कई बड़े शहरों में सोने और चांदी के भाव नीचे आए हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. 7 जुलाई 2026 को दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के सर्राफा बाजार तक कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु समेत कई बड़े शहरों में सोने और चांदी के भाव नीचे आए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजार की सुस्ती का असर सीधे कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है.

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार कॉमेक्स (COMEX) में मंगलवार सुबह सोने की कीमत करीब 4,155.30 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई. वहीं चांदी का भाव लगभग 62 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. घरेलू वायदा बाजार MCX की बात करें तो पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,46,915 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 2,36,275 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई. खास बात यह रही कि दिल्ली के सर्राफा बाजार में एक ही दिन में चांदी की कीमत में 5,000 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा देश के कई प्रमुख शहरों में भी कीमतों में नरमी देखने को मिली.

आखिर क्यों सस्ता हुआ सोना और चांदी?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने और चांदी की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव बना रही है. जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की मांग अक्सर कमजोर पड़ जाती है, जिससे कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है. इसके अलावा वैश्विक बाजारों में कारोबार की रफ्तार भी फिलहाल धीमी बनी हुई है. घरेलू सर्राफा बाजार में भी खरीदारी पहले की तुलना में कम है. मांग घटने के कारण कारोबारियों ने अपने नए सौदों और कॉन्ट्रैक्ट का आकार भी सीमित कर दिया है. इन सभी कारणों का असर सीधे सोने और चांदी के भाव पर दिखाई दे रहा है.

निवेशकों की नजर इन अहम घटनाओं पर

कमोडिटी बाजार के निवेशक इस समय अमेरिका से आने वाले महंगाई (इन्फ्लेशन) के नए आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं. इन आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगाया जाएगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में बदलाव करेगा या नहीं. यदि ब्याज दरों को लेकर कोई बड़ा फैसला आता है, तो उसका असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है. मध्य पूर्व में तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है, जिसका अप्रत्यक्ष असर अन्य कमोडिटी बाजारों पर भी पड़ रहा है.

विशेषज्ञों की क्या है राय?

इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष और रिद्धि सिद्धि बुलियंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि हाल ही में अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया था. उस समय निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी कर सकता है, जिससे डॉलर कमजोर हुआ और सोने को सहारा मिला.

हालांकि अब बाजार की स्थिति बदल रही है. डॉलर फिर से मजबूत हुआ है, जिससे सोने और चांदी पर दबाव बढ़ा है. वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और ईरान की ओर से समुद्री मार्गों को लेकर उठाए गए कुछ कदम भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक परिस्थितियां ही यह तय करेंगी कि सोने और चांदी की कीमतें किस दिशा में जाएंगी.

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