ईरान से बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित अवरोध को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है. इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही में लंबे समय तक बाधा आने की स्थिति में भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही थी. हालांकि, शुक्रवार को सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था मजबूत है और देश केवल होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति पर निर्भर नहीं है.
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है. यही कच्चा तेल पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों के उत्पादन का आधार होता है. इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक तेल मध्य पूर्व के देशों से आता है और आमतौर पर यह आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है. हाल ही में ईरान से जुड़े संकट के कारण इस मार्ग से आपूर्ति बाधित होने की खबरें सामने आई थीं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई थी.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रखी है. अधिकारियों के मुताबिक देश की सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. जरूरत पड़ने पर उत्पादन को और बढ़ाने की क्षमता भी मौजूद है. वर्तमान में भारत में लगभग 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं. यदि आपूर्ति में किसी तरह की कमी आती है तो पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए निर्धारित एलपीजी को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसके अलावा भारत ने पिछले कुछ वर्षों में तेल आयात के स्रोतों में विविधता भी बढ़ाई है. सूत्रों के अनुसार देश रूस से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है. फरवरी महीने में रूस से भारत का तेल आयात करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो कुल आयात का लगभग 20 प्रतिशत है. इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने में मदद मिल रही है.
द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति को लेकर भी सरकार आश्वस्त है. अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर प्राथमिकताओं में बदलाव किया जा सकता है और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है. यानी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार के पास कई विकल्प मौजूद हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. इसकी चौड़ाई सबसे संकरे हिस्से में लगभग 55 किलोमीटर है. वैश्विक स्तर पर तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के बड़े हिस्से की ढुलाई इसी मार्ग से होती है. इसलिए इसे दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है.
हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है. इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है और कतर, संयुक्त अरब अमीरात तथा सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देशों को भी निशाना बना रहा है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर वैश्विक स्तर पर सतर्कता बढ़ गई है. First Updated : Friday, 06 March 2026