LPG कीमतों में भारी उछाल: कमर्शियल सिलेंडर 993 रुपये महंगा, 3000 के पार पहुंचे दाम
देश में एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली समेत कई शहरों में दाम 3000 रुपये के पार पहुंच गए हैं. हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है.

नई दिल्ली: देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. 1 मई 2026 से सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलो) के दाम में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिससे बाजार और आम उपभोक्ताओं पर इसका असर साफ नजर आने लगा है.
इस बढ़ोतरी के बाद प्रमुख शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें 3000 रुपये के पार पहुंच गई हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों को फिलहाल राहत मिली है.
कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की बढ़ोतरी
सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये का इजाफा किया है. ANI के मुताबिक, दिल्ली में अब एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3071.50 रुपये हो गई है, जबकि 1 अप्रैल को इसकी कीमत 2078.50 रुपये थी. यानी महज एक महीने में लगभग 1000 रुपये का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है.
होटल और रेस्टोरेंट पर पड़ेगा सीधा असर
कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से होटल, रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री पर सीधा प्रभाव पड़ेगा. इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसके अलावा, स्ट्रीट फूड के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं
कमर्शियल गैस महंगी होने के बावजूद घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर रखे गए हैं. ANI के अनुसार, रसोई गैस की कीमतों में आखिरी बार 7 मार्च को बढ़ोतरी हुई थी.
- दिल्ली में कीमत: 913 रुपये
- मुंबई में कीमत: 912.50 रुपये
- चेन्नई में कीमत: 928.50 रुपये
- कोलकाता में कीमत: 939 रुपये
- ईरान-अमेरिका तनाव का असर
गैस की कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता प्रभावित हुआ है, जहां से भारत बड़े स्तर पर तेल और गैस का आयात करता है.
इस मार्ग में रुकावट के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत को अन्य देशों से आयात बढ़ाना पड़ा है. इससे लागत में इजाफा हुआ और आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिसका असर सीधे गैस की कीमतों पर देखने को मिला है.


