दिग्गज अभिनेता और टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अपने बेबाक बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं. इस बार उन्होंने मांसाहारी भोजन और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर बड़ा बयान दिया है. शत्रुघ्न सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि पूरे देश में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने यूसीसी को लागू करने का समर्थन भी किया.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत में क्षेत्रीय मतभेदों के कारण यूसीसी को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति से अलग हटकर सर्वदलीय चर्चा करनी चाहिए. उन्होंने उत्तराखंड में यूसीसी के सफल क्रियान्वयन की भी सराहना की.
बीफ बैन पर सवाल का जवाब देते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बीफ ही क्यों, उन्हें तो देश में मांसाहारी भोजन पर ही प्रतिबंध लगाने की बात करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे देश में कुछ जगहों पर बीफ पर बैन है, लेकिन कुछ इलाकों में यह खुलेआम बिकता है. नॉर्थईस्ट में लोग इसे खुलेआम खा सकते हैं, लेकिन नॉर्थ इंडिया में यह नहीं होता.
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जो नियम नॉर्थ इंडिया में लागू हो सकते हैं, वे नॉर्थईस्ट राज्यों में लागू नहीं किए जा सकते. यूसीसी के बारे में भी उन्होंने कहा कि इसमें कई बारीकियां और खामियां हैं. ऐसे में इस पर राजनीति से हटकर सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए, जिसमें इस पर चर्चा की जाए.
गुजरात की बीजेपी सरकार ने राज्य में यूसीसी की आवश्यकता का आकलन करने और इसके मसौदे को तैयार करने के लिए मंगलवार को एक कमेटी का गठन किया. इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना देसाई करेंगी. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह कमेटी 45 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद यूसीसी के कार्यान्वयन पर फैसला लिया जाएगा.
कमेटी के बारे में एक अधिकारी ने बताया कि यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए मुस्लिम समुदाय समेत धार्मिक नेताओं से भी मुलाकात करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी की आवश्यकता का आकलन करने और इसका मसौदा विधेयक तैयार करने के लिए, हमने एक कमेटी बनाई है. इस कमेटी में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सीएल मीणा, अधिवक्ता आरसी कोडेकर, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ भी शामिल हैं. First Updated : Wednesday, 05 February 2025