जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक कश्मीरी पोनीवाला की मौत के बाद देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा चरम पर है. इस हमले के बाद, बॉलीवुड में भी इसका असर साफ नजर आ रहा है. पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान की फिल्म 'अबीर गुलाल' की रिलीज पर रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही एक नई बहस ने जोर पकड़ लिया है- क्या पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करने दिया जाना चाहिए?
इस मुद्दे पर मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने दो अहम पहलुओं को सामने रखते हुए संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि ये 'वन-वे ट्रैफिक' रहा है जहां भारत ने हमेशा पाकिस्तानी कलाकारों को मंच दिया, लेकिन इसका कभी बराबरी से जवाब नहीं मिला.
जावेद अख्तर ने स्पष्ट कहा कि इस मुद्दे के दो पहलू हैं और दोनों ही अपने-अपने स्थान पर तर्कसंगत हैं. लेकिन अभी के हालात में मैं यही कहूंगा कि पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि हमने नुसरत फतेह अली खान, गुलाम अली और नूरजहां जैसे पाक कलाकारों को खुले दिल से स्वीकार किया. फैज अहमद फैज को भी भारत में राज्य प्रमुख जैसी इज्जत दी गई. लेकिन कभी लता मंगेशकर को पाकिस्तान बुलाया गया क्या? नहीं.
जावेद ने बताया कि पाकिस्तान के लोगों में भारतीय कलाकारों के लिए भरपूर प्यार है, लेकिन वहां की व्यवस्था ने कभी आपसी सांस्कृतिक संबंधों को बराबरी नहीं दी. लता मंगेशकर पर पाकिस्तान के कवियों ने कविताएं लिखी, लेकिन उन्हें कभी परफॉर्म करने के लिए पाकिस्तान बुलाया नहीं गया.
जावेद अख्तर ने दूसरी ओर ये भी कहा कि अगर भारत में पाक कलाकारों पर प्रतिबंध लगता है, तो इससे पाकिस्तान के कट्टरपंथियों और सेना को फायदा पहुंचता है. ये वो लोग हैं जो चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच दीवारें खड़ी रहें. दोस्ती उन्हें रास नहीं आती.
सूत्रों के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि फवाद खान की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ भारत में रिलीज नहीं होगी. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना समेत कई समूहों ने इसका विरोध किया था. फिल्म के दो गाने, जो पहले यूट्यूब पर रिलीज हुए थे, अब हटा दिए गए हैं. First Updated : Tuesday, 29 April 2025