नई दिल्ली : राजधानी के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट' के दौरान हुए सुरक्षा उल्लंघन ने अब एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की नीतियों के खिलाफ अर्धनग्न प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के चार प्रमुख कार्यकर्ताओं को अदालत ने विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस की हिरासत में सौंप दिया है. दिल्ली पुलिस का मानना है कि इस घटना के पीछे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की संलिप्तता और सुनियोजित फंडिंग हो सकती है.
आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अदालत के सामने यह सनसनीखेज दावा किया कि यह प्रदर्शन नेपाल में हाल ही में हुए हिंसक 'जेन-जेड' आंदोलन से पूरी तरह प्रेरित था. जिसने वहां की सरकार को गिराने में मुख्य भूमिका निभाई थी. पुलिस के अनुसार. प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य भारत में भी इसी तरह की अराजकता और अस्थिरता का माहौल पैदा करना था. इस दावे के बाद अदालत ने आरोपियों को डिजिटल सबूतों के साथ आमने-सामने बिठाकर सघन पूछताछ करने की अनुमति प्रदान की है.
जांच का एक मुख्य केंद्र वे टी-शर्ट्स हैं. जिन्हें पहनकर कार्यकर्ताओं ने समिट के दौरान नारेबाजी की थी. इन विशेष रूप से तैयार टी-शर्ट्स पर 'पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड'. 'इंडिया-यूएस ट्रेड डील' और 'एपस्टीन फाइल्स' जैसे गंभीर नारे लिखे हुए थे. साथ ही उन पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें भी छपी थीं. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन नारों का असली स्रोत क्या था और इन सामग्रियों को तैयार करने के लिए पैसा कहां से आया था.
गौरतलब है कि शुक्रवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के लगभग दस कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़कर भारत मंडपम परिसर के भीतर घुसने में सफल रहे थे. अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान हुई इस घुसपैठ ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने शनिवार सुबह इन कार्यकर्ताओं को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया और यह दलील दी कि देश की सुरक्षा और छवि से जुड़े इस मामले में गहन जांच बेहद अनिवार्य है.
आरोपियों के वकील ने पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह काल्पनिक बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया. उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल केवल लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे और उनका प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक था. वकील ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं ने किसी पर हमला नहीं किया. बल्कि उलटे वहां मौजूद लोगों ने ही उनके साथ मारपीट की थी. कांग्रेस पार्टी ने भी इस प्रदर्शन को अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए अपने कार्यकर्ताओं का बचाव किया है.
इस घटना ने भाजपा और कांग्रेस के बीच एक तीखी राजनीतिक जंग छेड़ दी है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भूपेंद्र यादव ने इस कृत्य को 'राष्ट्रविरोधी' बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की वैश्विक छवि को गहरा आघात पहुँचा है. इसके विरोध में भाजपा युवा मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और भिवंडी में राहुल गांधी को काले झंडे दिखाकर अपना रोष प्रकट किया. फिलहाल. पुलिस रिमांड के दौरान इस पूरी योजना के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब करने की कोशिश करेगी. First Updated : Saturday, 21 February 2026