मोदी की इजरायल यात्रा से पहले धमाका, नेतन्याहू बनाएंगे 6 देशों का महा-गठबंधन, किसके खिलाफ है ये चाल?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक रोमांचक और महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है. 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' यानी छह कोनों वाला एक मजबूत गठबंधन.

नई दिल्ली: भारत के लिए यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार, 25 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर इजराइल रवाना होंगे. इस दौरे के दौरान वे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे. दौरे से पहले नेतन्याहू ने पीएम मोदी को अपना प्रिय मित्र बताते हुए दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों पर जोर दिया है.
नेतन्याहू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी के ऐतिहासिक दौरे का जिक्र किया. उन्होंने इस रिश्ते को दो वैश्विक नेताओं के बीच मजबूत गठजोड़ बताते हुए कहा कि इजराइल और भारत नवाचार, सुरक्षा और समान रणनीतिक दृष्टिकोण में साझेदार हैं. इसी बीच, नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया में या उसके आसपास सहयोगी देशों का एक नेटवर्क बनाने की योजना का खुलासा किया, जिसे 'हेक्सागन ऑफ अलायंसेस' नाम दिया गया है. इस गठबंधन का उद्देश्य कट्टरपंथी दुश्मनों के खिलाफ एकजुट होना है.
नेतन्याहू का एक्स पोस्ट
नेतन्याहू ने X पर लिखा, कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में मैंने अपने प्यारे दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक दौरे के बारे में बात की.
हेक्सागन ऑफ अलायंसेस क्या है?
नेतन्याहू के अनुसार, हेक्सागन ऑफ अलायंस छह देशों का एक ढांचा होगा, जिसमें पश्चिम एशिया या उसके आसपास के देश शामिल होंगे. इजराइली पीएम ने भारत, ग्रीस, साइप्रस तथा अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों को इस गठबंधन का हिस्सा माना है. टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा, मेरे सामने जो विजन है उसके हिसाब से हम एक पूरा सिस्टम बनाएंगे. यहां मकसद देशों का एक ऐसा एक्सिस बनाना है जो असलियत, चुनौतियों और लक्ष्यों पर रेडिकल एक्सिस के खिलाफ एक जैसा सोचते हों.
IMEC जैसा होगा यह गठबंधन
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह अलायंस IMEC यानी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर के विजन जैसा होगा, जिसका मकसद कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना है. ये गठबंधन आर्थिक सहयोग, कूटनीतिक समन्वय और सुरक्षा सहयोग पर जोर देगा.
ईरान को जवाब देने की कोशिश
यह प्रस्तावित गठबंधन ईरान को जवाब देने के लिए तैयार किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू शिया एक्सिस के खिलाफ अपनी जीत दोहराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस के रूप में जाना जाता है. यह ईरान केंद्रित नेटवर्क है जो मध्य पूर्व में इजराइल और पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता है.
हमास की प्रतिक्रिया
हमास के प्रवक्ता हेजम कासिम ने नेतन्याहू के हेक्सागन ऑफ अलायंस प्लान को खारिज कर दिया. कासिम ने कहा, जो हो रहा है वह इलाके को इस तरह से बदलने की कोशिश है जिससे सिर्फ कब्जे वाले देशों के इंटरेस्ट पूरे हों.
भारत के लिए अवसर और चुनौतियां
नई दिल्ली के लिए हेक्सागन ऑफ अलायंसेस में अवसर और चुनौतियां दोनों हैं. रणनीतिक रूप से यह पश्चिम एशिया में भारत की उपस्थिति को मजबूत कर सकता है, रक्षा-प्रौद्योगिकी तक पहुंच बढ़ा सकता है और IMEC जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स से जुड़ सकता है. हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर भारत को अरब देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों तथा ईरान में हितों के बीच संतुलन बनाना होगा.


