भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने अपने आक्रामक रुख से पाकिस्तानी विमानों को भारतीय सीमा में घुसने से रोक दिया और कई को मार गिराया. ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष मीडिया ब्रीफिंग में एयर मार्शल ए.के. भारती ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा सीमा उल्लंघन के प्रयासों को विफल कर दिया गया और वायुसेना ने आतंकवाद के अड्डों को सटीक निशाना बनाया.
एयर मार्शल भारती ने जानकारी दी कि पाकिस्तान द्वारा भेजे गए ड्रोन और लड़ाकू विमानों को समय रहते न केवल रोका गया, बल्कि उनमें से कई को मार गिराया गया. “हमने उनकी ओर से नुकसान पहुंचाया है और अपने क्षेत्र की रक्षा सफलतापूर्वक की है,” उन्होंने कहा. यह संदेश साफ था कि भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली किसी भी आक्रामक गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है.
भारतीय वायुसेना ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया उनमें पाकिस्तान के अंदर स्थित चकलाला, रहीम यार खान और रफीक जैसे स्थान शामिल थे. इन हमलों का उद्देश्य था. आतंकी ठिकानों को खत्म करना और यह दर्शाना कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा. एयर मार्शल ने विश्वासपूर्वक कहा, “हमने जो लक्ष्य तय किए थे, वे सभी पूरे हुए हैं.”
भारतीय वायुसेना के सभी पायलट सुरक्षित और सकुशल लौट आए हैं. एयर मार्शल भारती ने इसे वायुसेना की उच्चस्तरीय रणनीति और तैयारी का प्रमाण बताया. उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि युद्ध में नुकसान संभव है, फिर भी भारत ने न्यूनतम क्षति के साथ अधिकतम परिणाम हासिल किए हैं.
8 और 9 तारीख की रात को पाकिस्तान की ओर से भारी ड्रोन हमलों के बाद भारत ने सोच-समझकर जवाबी कार्रवाई की. प्रेस वार्ता में बताया गया कि यह प्रतिक्रिया केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित रखी गई ताकि नागरिकों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे. भारत का यह मापा हुआ जवाब दुनिया को यह दिखाने के लिए था कि वह जिम्मेदार परमाणु शक्ति है, जो आवश्यकता पड़ने पर सख्त कदम भी उठा सकती है.
पाकिस्तान ने इस संघर्ष में 'ऑपरेशन बन्यानुन मार्सोस' नामक जवाबी अभियान चलाया, जिसमें लगभग 300 से 400 ड्रोन का प्रयोग किया गया. इन हमलों में भारत के 36 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें धार्मिक स्थल और सैन्य प्रतिष्ठान दोनों शामिल थे. हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता से बड़े पैमाने पर नुकसान को टाला गया. First Updated : Sunday, 11 May 2025