पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का 71 वर्ष की उम्र में निधन, TMC में कभी ममता के बाद थे नंबर-2

ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगी और तृणमूल कांग्रेस की दूसरी पंक्ति माने जाने वाले मुकुल रॉय ने 2017 में सबको हैरान कर दिया. अचानक उन्होंने जहाज छोड़ भाजपा की राह पकड़ ली. वो भी 2019 लोकसभा चुनाव से सिर्फ़ दो साल पहले. पिछले दो सालों में उनकी सेहत तेजी से बिगड़ी और वे बार-बार अस्पताल में भर्ती होते रहे.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का रविवार को 1:30 बजे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया. उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इसकी पुष्टि की. लंबे समय से डिमेंशिया और कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मुकुल रॉय कुछ दिन पहले कोमा में चले गए थे. उनकी मौत से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हो गया है.

ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी रहे मुकुल रॉय ने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे. तृणमूल कांग्रेस के सह-संस्थापक सदस्यों में शुमार रॉय 2017 में भाजपा में शामिल होकर सबको चौंका दिए थे. जहां उन्होंने बंगाल में पार्टी को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाई. बाद में स्वास्थ्य बिगड़ने के बीच वे फिर से टीएमसी में लौट आए. उनकी जिंदगी बंगाल की राजनीति के सबसे चर्चित और रहस्यमयी चेहरों में से एक रही.

पुत्र का भावुक बयान

मीडिया से बातचीत में भावुक सुभ्रांशु रॉय ने कहा कि सब कुछ खत्म हो गया. दोपहर करीब 1:30 बजे दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई. उसके बाद उन्हें वापस जीवित करना संभव नहीं था.

स्वास्थ्य की लगातार बिगड़ती स्थिति

पिछले दो सालों से मुकुल रॉय बार-बार अस्पताल में भर्ती होते रहे. उनकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती गई. वे परिचित चेहरों को पहचानने की क्षमता खो चुके थे और उन्हें राइल्स ट्यूब के जरिए तरल आहार दिया जा रहा था. सूत्रों के अनुसार, सोमवार को उनके पार्थिव शरीर को उनके आवास पर लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा.

राजनीतिक सफर

ममता बनर्जी के सबसे विश्वसनीय सहयोगी और पार्टी के दूसरे नंबर माने जाने वाले मुकुल रॉय ने 2017 में अचानक भाजपा जॉइन कर सबको हैरान कर दिया. 2019 लोकसभा चुनाव से महज दो साल पहले यह कदम भाजपा के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ. उन्होंने कई बड़े नेताओं को पार्टी में लाकर बंगाल में भाजपा की जमीनी ताकत खड़ी की. 2019 में भाजपा ने 42 में से 18 लोकसभा सीटें जीतीं, जिसमें रॉय की रणनीति अहम रही.

2021 विधानसभा चुनाव 

2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर से जीत हासिल की. लेकिन पार्टी में उनका प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा. सुवेंदु अधिकारी के विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने के एक महीने बाद ही उन्होंने भाजपा छोड़ दी. अंततः 11 जून 2021 को वे ममता बनर्जी के साथ टीएमसी में वापस लौटे.

बंगाल राजनीति के चाणक्य

बंगाल राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले मुकुल रॉय ने 1998 में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. 2011 में वाम मोर्चा से सत्ता छीनने में उनकी अहम भूमिका रही. यूपीए-2 सरकार में वे शिपिंग राज्य मंत्री और मार्च से सितंबर 2012 तक रेल मंत्री रहे.

विवाद और पार्टी से दूरी

सराधा चिटफंड घोटाले और नारदा मामले में स्टिंग ऑपरेशन के बाद 2015 में उन्हें टीएमसी से जनरल सेक्रेटरी पद से हटा दिया गया. इन विवादों के बाद उनका ममता बनर्जी से रिश्ता खराब हुआ.

डिमेंशिया और विधायक पद से अयोग्यता

2023 में डिमेंशिया के लक्षण सार्वजनिक हुए, जब उन्होंने दिल्ली में खुद को भाजपा विधायक बताया. 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने एंटी-डिफेक्शन कानून के उल्लंघन पर उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया.

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