बेहतर भविष्य की तलाश में गया था रूस, आखिरी कॉल के बाद घर लौटी अस्थियां; जानें हरियाणा के अंकित की पूरी कहानी

हरियाणा का एक युवक पढ़ाई के लिए विदेश गया, लेकिन नौकरी के झांसे में युद्ध क्षेत्र में फंस गया. महीनों बाद उसकी मौत की खबर आई. परिवार शोक में है और अन्य लापता युवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है.

Shraddha Mishra

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक छोटे से गांव कुम्हारिया में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है. गांव का हर कोना 23 साल के अंकित जांगड़ा की याद में डूबा है, जिसकी घर वापसी जिंदा नहीं बल्कि अस्थियों के रूप में हुई. एक ऐसा सपना, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर विदेश गया था, अब दर्दनाक कहानी बन चुका है. अंकित की आखिरी पुकार-"हमें बचा लीजिए" आज भी उसके परिवार के कानों में गूंज रही है.

अंकित जांगड़ा फरवरी 2025 में पढ़ाई के लिए मॉस्को गया था. वहां उसने भाषा कोर्स में दाखिला लिया और खर्च चलाने के लिए एक छोटे से काम में लग गया. इसी दौरान एक एजेंट ने उसे और उसके दोस्त को अच्छी सैलरी वाली नौकरी का लालच दिया. लेकिन यह लालच एक जाल साबित हुआ. अंकित समेत देश के कई युवाओं को धोखे से युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया. उनके साथ अलग-अलग राज्यों के करीब 15 युवक भी थे, जो बेहतर जीवन की तलाश में घर से निकले थे.

युद्ध क्षेत्र में कैद जैसी जिंदगी

अंकित ने अपनी आखिरी बातचीत में जो बताया, वह बेहद दर्दनाक था. उन्हें एक ऐसे इलाके में रखा गया, जहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं था. कुछ दिनों की ट्रेनिंग के बाद उन्हें बड़ी रकम और मासिक वेतन का वादा किया गया, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग थी. खाने के लिए सिर्फ साधारण चीजें मिलती थीं और हालात इतने खराब थे कि कई साथी अपनी जान गंवा चुके थे. हर दिन डर और अनिश्चितता के बीच गुजर रहा था.

जब अंकित और उसके साथियों ने घर लौटने की बात कही, तो उन्हें डराया गया. साफ कह दिया गया कि अब वापसी संभव नहीं है. या तो उन्हें वहीं रहकर लड़ना होगा या फिर जान गंवानी होगी. इस तरह की मजबूरी ने इन युवाओं को ऐसी स्थिति में डाल दिया, जहां उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था.

गांव पहुंचे अंकित के अवशेष

अंकित के परिवार ने उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया. उन्होंने सरकारी दफ्तरों से लेकर दूतावास तक गुहार लगाई. कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की. लेकिन सभी कोशिशें नाकाम रहीं. महीनों तक इंतजार और उम्मीद के बाद आखिरकार वह खबर आई, जिसने परिवार को तोड़कर रख दिया.

जब अंकित के अवशेष उसके गांव पहुंचे, तो माहौल बेहद भावुक हो गया. परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक की लहर है. लोग आक्रोशित भी हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. सबसे बड़ी चिंता अब उसके दोस्त की है, जिसका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. गांव वालों के मन में कई सवाल हैं- क्या बाकी युवाओं को सुरक्षित वापस लाया जाएगा? क्या ऐसे एजेंटों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे?

बढ़ती घटनाएं और बड़ा सवाल

अंकित की कहानी अकेली नहीं है. हाल के समय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां युवाओं को विदेश में नौकरी का लालच देकर खतरनाक हालात में धकेल दिया गया. संदिग्ध एजेंट सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं और उन्हें झूठे वादों में फंसा रहे हैं. यह एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है.

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