नई दिल्ली: देशभर में मॉनसून के दस्तक देते ही कुदरत का कड़ा रूप देखने को मिल रहा है. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से कई राज्यों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है. गुजरात, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. नदियां उफान पर हैं, मुख्य सड़कें जलमग्न हैं और रिहायशी इलाकों में पानी घुसने से लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं.
नवसारी और सूरत में हालात गंभीर
गुजरात के पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में बारिश का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है. नवसारी, अहमदाबाद, सूरत और वलसाड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से निचले इलाके पूरी तरह डूब चुके हैं.
सड़कों का हाल: सड़कें ताल-तलैयों में तब्दील हो गई हैं और खड़ी गाड़ियां पानी में बहती या आधी डूबी नजर आ रही हैं.
आवागमन पर असर: नवसारी में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लोगों को दफ्तर या जरूरी कामों के लिए सड़कों पर नावों का सहारा लेना पड़ रहा है.
बचाव कार्य: बिगड़ते हालात को देखते हुए एनडीआरएफ की टीमों ने कमान संभाल ली है और बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.
उत्तराखंड में नदियां खतरे के निशान के पास
देवभूमि उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश से पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में संकट गहरा गया है. ऊपरी जलागम क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश की वजह से अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है.
दोनों प्रमुख नदियां खतरे के निशान पर
दोनों प्रमुख नदियां खतरे के निशान के बिल्कुल करीब बह रही हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है और स्थानीय लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है.
झेलम का जलस्तर बढ़ा
जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में बारिश के कारण प्रशासन को हाई अलर्ट जारी करना पड़ा है.
अनंतनाग: यहां लगातार बारिश से झेलम नदी का जलस्तर खतरे के स्तर की ओर बढ़ रहा है. प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है.
रियासी: रियासी जिले में भारी जलभराव को देखते हुए सलाल बांध के कई गेट खोल दिए गए हैं, ताकि पानी के दबाव को नियंत्रित किया जा सके.
जलाशयों में पानी का भारी दबाव
महाराष्ट्र में भी मॉनसून की शुरुआत से ही भारी बारिश का दौर जारी है. राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. पुणे और आसपास के क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण पवना बांध अपनी कुल क्षमता का 95% तक भर चुका है. बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है.
First Updated : Friday, 24 July 2026