लोकसभा में दूसरे दिन भी हंगामा, विपक्ष के 8 सांसद पूरे सत्र के लिए सस्पेंड...कार्रवाई कल सुबह तक के लिए स्थगित

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आज यानी मंगलवार को भी हंगामा देखने को मिला. जिसके बाद विपक्ष के 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया. इसके साथ ही लोकसभा की कार्रवाई कल सुबह 11 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.

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नई दिल्ली : लोकसभा में बजट सत्र के दौरान 3 फरवरी 2026 को दूसरे दिन भी तीव्र हंगामा मचा रहा. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के आधार पर 2020 के भारत-चीन सीमा टकराव का मुद्दा उठाया.

उन्होंने एक पत्रिका में प्रकाशित लेख का हवाला देते हुए दावा किया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसमें प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की भूमिका पर सवाल उठते हैं, लेकिन स्पीकर ने उन्हें आगे बोलने से रोक दिया. इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिससे सदन में अफरा-तफरी फैल गई.

विपक्षी सांसदों ने आसन में कागज के टुकड़े फेंके

आपको बता दें कि विपक्षी सांसदों ने राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न मिलने पर नारेबाजी की और स्पीकर आसन की ओर कागज के टुकड़े फेंक दिए, जिसे सदन की मर्यादा भंग माना गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नियम 374(2) के तहत प्रस्ताव पेश किया कि इन सदस्यों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जाए. प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया.

पूरे सत्र के लिए निलंबित हुए 8 सांसद 

जिन आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है उनके नाम हैं, मणिक्कम टैगोर, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पडोले, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, एस. वेंकटेशन, गुरजीत सिंह औजला और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग शामिल हैं, जो मुख्यतः कांग्रेस से हैं. 

सांसद की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थगित 
पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने इनकी घोषणा करते हुए सदन की कार्यवाही बुधवार तक स्थगित कर दी.इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने निलंबन को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए नारेबाजी की और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ भी आवाज बुलंद की.

विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलने से रोका गया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सदन की गरिमा का अपमान बताया. यह घटना संसद में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर गई है.  First Updated : Tuesday, 03 February 2026

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