कोलकता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं, जिससे टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है.
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बंगाल की राजनीति में इसे बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 29 सांसदों में से करीब 12 सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा पांच से छह अन्य सांसदों के साथ भी बातचीत चलने की चर्चा है.
बताया जा रहा है कि भाजपा और असंतुष्ट सांसदों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है. यदि यह राजनीतिक समीकरण आगे बढ़ता है, तो बंगाल की राजनीति में बड़ा असर देखने को मिल सकता है.
सूत्रों का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए कम से कम 19 से 20 सांसदों को एक साथ लाने की रणनीति तैयार की जा रही है. इसी वजह से संख्या बढ़ाने की कोशिशें तेज बताई जा रही हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में सांसद एक साथ कदम उठाते हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है.
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि संभावित टूट में कुछ ऐसे सांसदों के नाम भी शामिल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है.
इसी वजह से यह मामला सिर्फ संगठनात्मक संकट नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के लिए भी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं रहना चाहती. चर्चा है कि पार्टी की नजर अब राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों पर भी बनी हुई है.
बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक शैली और आइपैक की भूमिका को लेकर भी असंतोष है. हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
लोकसभा में भाजपा के पास फिलहाल 240 सांसद हैं और केंद्र सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है. ऐसे में यदि तृणमूल कांग्रेस के सांसद भाजपा के साथ आते हैं, तो पार्टी की संसदीय ताकत और मजबूत हो सकती है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इससे भाजपा की सहयोगी दलों पर निर्भरता भी कम हो सकती है. First Updated : Tuesday, 26 May 2026