नई दिल्ली : केदारनाथ धाम में अब श्रद्धालुओं को दर्शन के समय मोबाइल फोन या कैमरे का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी. बद्री-केदार मंदिर समिति और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने मिलकर यह सख्त निर्णय लिया है. नए नियमों के तहत मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी, वीडियो बनाना या सोशल मीडिया के लिए रील तैयार करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा. इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
बढ़ती घटनाओं ने बनाया प्रतिबंध जरूरी
आपको बता दें कि इस प्रतिबंध का मुख्य कारण पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसर में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग में आई तेज वृद्धि है. लाखों श्रद्धालु हर साल बाबा केदार के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कई लोग दर्शन के बजाय फोटो खींचने और वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं. इससे मंदिर की पवित्रता और गरिमा प्रभावित होती है, भीड़ का प्रवाह बाधित होता है और अन्य श्रद्धालुओं को असुविधा होती है. सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
प्रवेश से पहले जमा करने होंगे फोन
इस बार प्रशासन पूरी तैयारी के साथ इस प्रतिबंध को लागू करने जा रहा है. रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि एक ठोस योजना तैयार की जा रही है. संभावना है कि श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले अपने मोबाइल फोन और कैमरे सुरक्षित लॉकरों में जमा कराने होंगे. पहले भी ऐसे प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो पाए थे, क्योंकि कुछ श्रद्धालु चोरी छिपे मोबाइल अंदर ले जाते रहे. इस बार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है.
मंदिर समिति का स्पष्ट रुख
बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरवान ने स्पष्ट किया कि समिति ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि श्रद्धालु आस्था और भक्ति के साथ दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कुछ लोगों का फोटो और वीडियो बनाने पर ध्यान केंद्रित करना अनुचित है. इससे पूरे माहौल और प्रबंधन पर बुरा असर पड़ता है. समिति का उद्देश्य मंदिर की पवित्रता और दर्शनार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है.
मर्यादा को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह नया सख्त नियम कितना प्रभावी साबित होता है. प्रशासन और मंदिर समिति की यह पहल केदारनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा और परंपरा को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. सफल क्रियान्वयन से न केवल दर्शन का अनुभव अधिक आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण होगा, बल्कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा में भी सुधार होगा. श्रद्धालुओं से अपेक्षा है कि वे इस नियम का पालन करके मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने में सहयोग देंगे.
First Updated : Saturday, 31 January 2026