क्या NDA का समर्थन करेगी NCP परिसीमन बिल पर विपक्ष से अलग दिख सकती है शरद पवार

परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की एनसीपी इस मुद्दे पर विपक्ष से अलग रुख अपनाते हुए एनडीए सरकार के विवादास्पद परिसीमन विधेयक का समर्थन करेगी.

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नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है. सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह विपक्ष के साझा रुख से अलग कदम माना जाएगा और संसद में इस मुद्दे पर नई राजनीतिक तस्वीर देखने को मिल सकती है.

सूत्रों के अनुसार, शरद पवार गुट वाली एनसीपी परिसीमन से जुड़े विवादित विधेयक पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने पर विचार कर रही है. पिछली बार जब यह मुद्दा संसद में आया था, तब विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था. ऐसे में यदि एनसीपी अपना रुख बदलती है, तो इसका असर विपक्ष की रणनीति पर भी पड़ सकता है. हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

देर रात बैठकों ने बढ़ाई अटकलें

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक चर्चाओं को उस समय और बल मिला, जब खबर सामने आई कि एनसीपी के दोनों गुटों के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से देर रात मुलाकात की. इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या दोनों एनसीपी गुटों के बीच फिर से नजदीकियां बढ़ रही हैं और क्या भविष्य में केंद्र में एनडीए के साथ किसी तरह का सहयोग देखने को मिल सकता है. हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

सुप्रिया सुले ने क्या कहा?

एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन अटकलों पर सीधे तौर पर कोई पुष्टि नहीं की. उन्होंने कहा कि पार्टी का अंतिम फैसला विधेयक के अंतिम स्वरूप और उसमें किए गए प्रावधानों को देखने के बाद ही लिया जाएगा. सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि सरकार सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान करती है और इसके लिए स्पष्ट योजना सामने लाती है, तो उनकी पार्टी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार कर सकती है.

अमित शाह पहले भी दे चुके हैं आश्वासन

सुप्रिया सुले का यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस पुराने आश्वासन से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से बढ़ाने के लिए तैयार है ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो. लोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा था कि यदि सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि को लेकर आपत्ति है, तो सरकार आवश्यक संशोधन लाने के लिए तैयार है. उनका कहना था कि इस व्यवस्था से किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा. हालांकि बाद में यह प्रस्ताव अंतिम मसौदे का हिस्सा नहीं बन पाया.

किस विधेयक को लेकर है पूरा विवाद?

केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को लागू करने का प्रस्ताव लेकर आई थी. इस विधेयक का उद्देश्य देश में नई जनगणना और परिसीमन के आधार पर संसदीय सीटों का पुनर्गठन करना है. हालांकि अप्रैल में यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और पारित नहीं हो पाया.

जयंत पाटिल की मुलाकात पर भी दी सफाई

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ जयंत पाटिल की मुलाकात को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि यह मुलाकात केवल प्रशासनिक और औपचारिक कारणों से हुई थी. उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कार्यों के सिलसिले में गए थे और बैठक को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.

कांग्रेस ने भी जताई चिंता

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी परिसीमन विधेयक को लेकर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस विधेयक के समर्थन के लिए कुछ क्षेत्रीय दलों से संपर्क कर रही है. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर कहा कि मौजूदा स्वरूप में परिसीमन लागू होने से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है, जिन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के अनुरूप जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है. उन्होंने क्षेत्रीय दलों से इस मुद्दे पर सावधानी बरतने की अपील भी की. First Updated : Wednesday, 15 July 2026