होला मोहल्ला अब सिर्फ उत्सव नहीं, स्थायी धार्मिक मॉडल की नई शुरुआत

पंजाब में इस बार होला मोहल्ला सिर्फ तीन दिन का आयोजन नहीं रहेगा।सरकार ने इसे स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल में बदलने की कोशिश की है।एसी टेंट सिटी और ग्रीन व्यवस्था इसकी मिसाल हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

इस बार श्री आनंदपुर साहिब में तस्वीर अलग है।होला मोहल्ला को नई सोच के साथ जोड़ा गया है।सरकार ने स्थायी एसी टेंट सिटी तैयार की है।इसे संगत को समर्पित किया गया।मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इसे ऐतिहासिक बताया।यह भारत की पहली सर्व-ऋतु टेंट सिटी कही जा रही है।संदेश साफ है कि आयोजन को स्थायी ढांचे में बदला जा रहा है।

क्या साल भर मिलेगा ठहराव?

अब हर साल अस्थायी टेंट लगाने की जरूरत नहीं होगी।टेंट सिटी साल भर चालू रहेगी।श्रद्धालु किसी भी मौसम में आ सकेंगे।धार्मिक पर्यटन को नया आधार मिलेगा।स्थानीय कारोबार को भी लाभ होगा।सरकार इसे लंबी योजना का हिस्सा बता रही है।होला मोहल्ला अब तीन दिन तक सीमित नहीं रहेगा।

क्या आस्था के साथ आधुनिकता जुड़ी?

यह टेंट सिटी पूरी तरह एसी है।सफाई और सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया है।सीसीटीवी और कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं।रहने की सुविधा पहले से बेहतर है।तीर्थ यात्रा योजना वाले श्रद्धालु लाभ उठा सकेंगे।आस्था को आधुनिक सुविधा से जोड़ा गया है।यही मॉडल बदलाव की असली तस्वीर है।

क्या ग्रीन संदेश भी शामिल?

इस बार आयोजन को ग्रीन थीम दी गई है।सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूरी रोक रहेगी।लंगरों में बायोडिग्रेडेबल बर्तन इस्तेमाल होंगे।खर्च प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उठाएगा।लाखों श्रद्धालुओं को देखते हुए पर्यावरण को प्राथमिकता दी गई है।हर प्लेट और कप प्लास्टिक मुक्त होगा।उत्सव को जिम्मेदारी से जोड़ा गया है।

क्या भीड़ प्रबंधन की नई तैयारी?

28 पार्किंग जोन बनाए गए हैं।दो ट्रॉली सिटी और ट्रॉली स्ट्रीट तैयार की गई है।बाथरूम और सीसीटीवी की व्यवस्था की गई है।अलग-अलग इलाकों के लिए अलग योजना बनी है।चरण गंगा और झिंझड़ी में सुविधा केंद्र बनाए गए हैं।लक्ष्य है कि भीड़ नियंत्रित रहे।प्रशासन इसे टेस्ट केस मान रहा है।

क्या यातायात और पहुंच आसान?

100 ई-रिक्शा सेवा में लगाए जाएंगे।ये तख्त केसगढ़ साहिब तक चलेंगे।बुजुर्गों को राहत मिलेगी।जाम कम करने की कोशिश है।रास्ते साफ तौर पर चिन्हित किए गए हैं।आवागमन को सुगम बनाया जा रहा है।दर्शन अब पहले से आसान होंगे।

क्या यह विकास का संदेश?

2 और 3 मार्च को विशेष आतिशबाजी होगी।विरासत-ए-खालसा को रोशनी से सजाया गया है।शहर को नए रूप में तैयार किया गया है।तीन स्तर की सुरक्षा और 20 एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं।एम्बुलेंस और क्लिनिक सक्रिय रहेंगे।सरकार इसे नए पंजाब की तस्वीर बता रही है।सवाल यही है कि क्या यह मॉडल आगे भी कायम रहेगा।

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