चंडीगढ़ 1 मार्च 2025 को ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान शुरू हुआ था। उस समय इसे एक सरकारी पहल माना गया। लेकिन धीरे-धीरे यह राज्य की बड़ी मुहिम बन गई। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ कहा था कि तस्करों को बख्शा नहीं जाएगा। एक साल बाद तस्वीर बदली हुई दिख रही है। गांवों में चर्चा है कि अब कार्रवाई दिख रही है। परिवारों में उम्मीद लौटी है।
फरवरी 2026 तक 49 हजार से ज्यादा तस्कर पकड़े गए। 34 हजार से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं। हजारों किलो हेरोइन और अफीम जब्त हुई। करोड़ों की ड्रग मनी फ्रीज की गई। 548 तस्करों की 263 करोड़ की संपत्ति पर रोक लगी। संदेश साफ है कि अब नशे का कारोबार आसान नहीं।
सीमा पार से ड्रोन के जरिए आ रही खेप रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए। तरनतारन, फिरोजपुर और अमृतसर में खास निगरानी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हजारों सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। साइबर फ्रॉड के 80 करोड़ रुपये भी फ्रीज किए गए। यह दिखाता है कि कार्रवाई सिर्फ जमीन पर नहीं, तकनीक के सहारे भी हो रही है।
नशे के साथ जुड़ा नेटवर्क भी निशाने पर है। साल 2025 में कई आतंकी मॉड्यूल पकड़े गए। हथियार, आरडीएक्स और ग्रेनेड बरामद हुए। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने सैकड़ों मॉड्यूल तोड़े। करीब हजार गैंगस्टरों को जेल भेजा गया। यह संकेत है कि सरकार नशे और अपराध के गठजोड़ को तोड़ना चाहती है।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने खुले तौर पर इस अभियान की तारीफ की। कई मुद्दों पर सरकार और राजभवन में मतभेद रहे हैं। ऐसे में यह समर्थन राजनीतिक संकेत भी देता है। जब राज्य के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति अभियान की सराहना करे तो उसका असर दूर तक जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ पुलिस की लड़ाई नहीं। गांव-गांव में ‘पिंड दे पहरेदार’ सक्रिय किए गए हैं। लाखों लोगों को जागरूक किया जा रहा है। युवाओं को डी-एडिक्शन केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। स्कूलों में अभियान चल रहा है। यानी रोकथाम और इलाज दोनों पर जोर है।
नशा लंबे समय से बड़ी समस्या रहा है। अब सरकार दावा कर रही है कि कमर तोड़ दी गई है। आंकड़े कार्रवाई की कहानी कहते हैं। लोग भी बदलाव महसूस कर रहे हैं। यह लड़ाई लंबी है। लेकिन शुरुआत मजबूत दिख रही है। ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अब सिर्फ योजना नहीं, एक संकल्प बन चुका है। First Updated : Friday, 13 February 2026