नशा मुक्ति और सुधार की ओर पंजाब के कदम, जेलों में पुनर्वास सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए UNODC से मिलाया हाथ
पंजाब सरकार ने राज्य की जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वैश्विक स्तर पर अपने प्रयासों को तेज कर दिया है.

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य की जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वैश्विक स्तर पर अपने प्रयासों को तेज कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर लुधियाना में ‘नशा, एचआईवी और जेलों में कैदियों का स्वास्थ्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम, पंजाब जेल विभाग और गैर-सरकारी संस्था ‘टर्न योर कंसर्न इंटू एक्शन’ के संयुक्त सहयोग से आयोजित हुआ. जिसमें देश भर के स्वास्थ्य और जेल विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
मरीज और तस्कर में अंतर
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की नई नीति को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि सरकार अब नशा करने वाले मरीज और नशे की तस्करी करने वाले अपराधी में स्पष्ट अंतर कर रही है. इसी रणनीति के तहत पिछले 15 महीनों में 10,000 से अधिक नशा पीड़ितों को जेल भेजने के बजाय सीधे नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है. इसके अलावा, जेलों के भीतर 25,000 कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी और नशे से संबंधित सघन जांच की गई है.
ओओएटी क्लीनिक और कौशल विकास से पुनर्वास
जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कार्यक्रम में कहा कि पंजाब भले ही एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि में आगे हो, लेकिन अब राज्य को सुधारात्मक न्याय के क्षेत्र में भी देश के सामने एक मिसाल पेश करनी होगी. पंजाब की जेलों में वर्तमान में ओओएटी क्लीनिकों का नेटवर्क सक्रियता से काम कर रहा है. कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जेलों के भीतर मनोचिकित्सक, काउंसलर और आईटीआई के व्यावसायिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें.
वैश्विक मानकों के तहत जेलों में बदलाव
बैठक के दौरान आईजी जेल मुहम्मद तैयब ने जेलों की आंतरिक व्यवस्था और उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर एक विशेष प्रस्तुति दी. इस दौरान दक्षिण एशिया के लिए UNODC की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने अंतरराष्ट्रीय मानकों को साझा करते हुए इस वर्ष की थीम ‘वर्ल्ड ड्रग प्रॉब्लम पर्सिस्टिंग इश्यूज, न्यू चैलेंजेज़, इनोवेटिव रिस्पॉन्सेज़’ पर जोर दिया. बैठक में विशेष रूप से महिला कैदियों के प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक तनाव, दिव्यांगता और ओपिओइड आधारित उपचार की निरंतरता पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए. अंत में सभी संबंधित विभागों ने जेलों के भीतर मानवाधिकारों पर आधारित एक समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाकर काम करने का साझा संकल्प लिया.


