राज्यसभा में बदल रहे समीकरण! बहुमत के आंकड़ों के करीब पहुंचा NDA, TMC संकट से मिल सकता है बड़ा फायदा

राज्यसभा चुनाव के बाद एनडीए की स्थिति पहले से मजबूत हुई है, जिसके बाद गठबंधन अब दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस में चल रही अंदरूनी हलचल को भी एनडीए की बढ़ती ताकत के पीछे एक अहम कारण माना जा रहा है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: राज्यसभा के हालिया चुनावों के बाद संसद के उच्च सदन का राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है. 27 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को बड़ी सफलता मिली है, जिससे गठबंधन की ताकत और बढ़ गई है. इसके साथ ही एनडीए अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है. हालांकि अभी यह आंकड़ा हासिल नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

एनडीए की बढ़ती ताकत के पीछे तृणमूल कांग्रेस में चल रही अंदरूनी हलचल को भी एक अहम कारण माना जा रहा है. राज्यसभा में टीएमसी के कुल 13 सदस्य थे, लेकिन इनमें से चार सांसदों के इस्तीफे के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन खाली हुई सीटों पर भाजपा को फायदा मिल सकता है. जिन नेताओं ने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी है, उनमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरिक के नाम शामिल हैं. इन इस्तीफों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ संसद के समीकरणों को भी चर्चा का विषय बना दिया है.

और इस्तीफों की अटकलें तेज

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के कुछ और राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं. हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल पार्टी के पास राज्यसभा में नौ सदस्य बचे हुए हैं. यदि आगे भी इसी तरह का घटनाक्रम जारी रहता है, तो इसका सीधा असर सदन की संख्या पर पड़ सकता है.

राज्यसभा में क्या है मौजूदा स्थिति?

हाल ही में हुए चुनावों में एनडीए ने 27 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में गठबंधन की कुल संख्या 152 तक पहुंच गई है. उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों का समर्थन जरूरी माना जाता है. अगर टीएमसी से खाली हुई चार सीटों पर एनडीए समर्थित उम्मीदवार जीतते हैं, तो गठबंधन की संख्या बढ़कर 156 हो सकती है. वहीं, यदि भविष्य में और सांसद गठबंधन के पक्ष में आते हैं या विपक्षी दलों से इस्तीफे होते हैं, तो यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है.

आम आदमी पार्टी से भी मिला था बड़ा समर्थन

कुछ समय पहले आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने भी भाजपा का समर्थन किया था. इनमें राघव चड्ढा और हरभजन सिंह समेत सात सांसदों का नाम चर्चा में रहा. इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत हुई थी और पार्टी का आंकड़ा 110 से अधिक पहुंच गया था.

ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्यसभा में भाजपा 115 सांसदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी हुई है. इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चार-चार सदस्य हैं. शिवसेना के दो सांसद हैं, जबकि जनसेना पार्टी का एक सदस्य उच्च सदन में मौजूद है. इसके अलावा सात नामित सदस्य और चार निर्दलीय सांसद भी सदन का हिस्सा हैं.

मिजोरम से भी मिला समर्थन का संकेत

मिजोरम से हाल ही में राज्यसभा पहुंचे के. लालतलुआंगकिमा ने संकेत दिए हैं कि वे राज्य के विकास और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर एनडीए का समर्थन कर सकते हैं. वे जेडपीएम पार्टी से आते हैं, जो फिलहाल न तो एनडीए का हिस्सा है और न ही विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल है. उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी संसद में स्वतंत्र रुख बनाए रखेगी. साथ ही जेडपीएम के लोकसभा सांसद रिचर्ड वानलालहमंगाइहा भी किसी गठबंधन के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़े हैं. ऐसे में भविष्य में उनके रुख पर भी राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी.

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