नरेंद्र मोदी-मार्क कार्नी की मुलाकात से जमे रिश्तों की बर्फ पिघलेगी, भारत-कनाडा संबंधों का नया अध्याय शुरू

नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी की शिखर वार्ता का उद्देश्य भारत और कनाडा के रिश्तों को फिर से सामान्य कर ऊर्जा, व्यापार और परमाणु सहयोग को मजबूत करना है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी के बीच सोमवार को होने वाली अहम शिखर वार्ता में भारत और कनाडा अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से सामान्य और मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी में हैं. कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही तल्खी के बाद यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत दे सकती है.

क्या है वार्ता का मुख्य उद्देश्य? 

सूत्रों के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 से पहले जारी सहयोग प्रक्रियाओं, समझौतों और संयुक्त पहलों को नए दृष्टिकोण और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ दोबारा सक्रिय करना है. दोनों देश इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परमाणु सहयोग और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संस्थागत संवाद तंत्र को पुनर्जीवित किया जाए. साथ ही, व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए लक्ष्य तय करने और आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं पर आपसी समझ बढ़ाने पर भी चर्चा होगी.

ऊर्जा क्षेत्र सहयोग का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. जनवरी 2026 में गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक के दौरान दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर फिर से बातचीत शुरू की थी. कनाडा, जिसके पास कच्चे तेल और गैस के विशाल भंडार हैं. मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में नए और भरोसेमंद बाजारों की तलाश कर रहा है और भारत उसकी प्राथमिकता में शामिल है.

दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना है. वर्ष 2010 में हस्ताक्षरित और 2013 में लागू परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग के लिए संयुक्त तंत्र स्थापित किया गया था. इसके अलावा, 2015 में भारत और कनाडा की कंपनी कामेको कॉरपोरेशन के बीच यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ था. अब दोनों देश एक नए 10 वर्षीय अनुबंध को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जिससे भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों को दीर्घकालिक स्थिरता मिल सकती है.

प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और दुर्लभ खनिज जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने की योजना है. इस बार दोनों पक्ष चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से वार्ता को आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि व्यापार और निवेश में आई सुस्ती को दूर किया जा सके.

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था. भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया था. हालांकि, 2025 में सत्ता संभालने के बाद कार्नी लगातार संबंधों को सुधारने के प्रयास कर रहे हैं, और यह शिखर वार्ता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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