मुआवजा नहीं, जवाब चाहिए... अहमदाबाद प्लेन क्रैश के 10 महीने बाद भी अनसुलझे सवाल, पीड़ितों ने PM से की अपील
अहमदाबाद विमान हादसे के 10 महीने बाद पीड़ित परिवारों ने दुर्घटना की असली वजह जानने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि मुआवजा नहीं, बल्कि सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि उन्हें मानसिक शांति मिल सके.

अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया विमान के हादसे ने पिछले साल सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदल दी थी. यह दुर्घटना पिछले साल 12 जून को हुई थी, जब एयर इंडिया की फ्लाइट एआई 171 उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद हादसे का शिकार हो गई. अब उस दर्दनाक घटना को लगभग दस महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों के मन में आज भी एक ही सवाल गूंज रहा है- आखिर उस दिन हुआ क्या था? इसी सवाल का जवाब पाने के लिए अब परिवारों ने देश के प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है.
विमान सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुआ था और कुछ ही देर में एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर से टकरा गया. विमान में आग लगने के कारण हालात और भयावह हो गए. इस हादसे में विमान में आग लग गई, जिससे विमान में सवार 242 लोगों में से 241 लोगों की मौत हो गई. इनके अलावा, 19 और लोगों की मौत भी इसमें हो गई थी. यह घटना देश के सबसे दर्दनाक विमान हादसों में से एक बन गई.
परिवारों की एक ही मांग- सच्चाई सामने आए
अब, इस हादसे के करीब दस महीने बाद, गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से करीब 30 परिवार अहमदाबाद में एकत्र हुए. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हादसे की पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग की है. परिवारों का कहना है कि उन्हें यह जानने का अधिकार है कि दुर्घटना किस वजह से हुई. वे चाहते हैं कि कॉकपिट की आवाज रिकॉर्ड करने वाला यंत्र और उड़ान से जुड़े तकनीकी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके.
“हमें मुआवजा नहीं, जवाब चाहिए”
इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले कई लोग आज भी गहरे सदमे में हैं. एक पिता ने कहा कि उनके घर का सूनापन कभी खत्म नहीं होगा. उनके लिए किसी भी तरह की आर्थिक सहायता उस खालीपन को नहीं भर सकती. उनका कहना है कि उन्हें पैसे नहीं, बल्कि सच जानने की जरूरत है. वे जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी क्या गलती या समस्या हुई, जिससे इतना बड़ा हादसा हो गया.
पीड़ित परिवारों को हुई दिक्कत
पीड़ित परिवारों ने यह भी बताया कि उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हादसे के बाद सामान वापस पाने के लिए बनाई गई व्यवस्था उनके लिए आसान नहीं है. वेबसाइट पर कई चीजों की जानकारी तो दी गई है, लेकिन तस्वीरें साफ नहीं होने के कारण पहचान करना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, संपर्क के सीमित साधनों के कारण भी लोगों को दिक्कत हो रही है, खासकर उन लोगों को जो तकनीक से ज्यादा परिचित नहीं हैं.
इस पूरे मामले की जांच संबंधित एजेंसी को सौंपी गई थी, जिसने शुरुआती रिपोर्ट में कुछ अहम बिंदुओं की ओर इशारा किया था. अब अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, जो इस साल जून के आसपास आने की संभावना है. परिवारों को उम्मीद है कि इस रिपोर्ट के जरिए उन्हें अपने सवालों के जवाब मिलेंगे और हादसे के पीछे की सच्चाई सामने आएगी.


