लखनऊ अग्निकांड: 4 अधिकारी सस्पेंड, 3 आरोपी गिरफ्तार; अधिकारियों ने जांच की तेज

आग लगने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिसकर्मियों ने बहादुरी दिखाई। जब बिल्डिंग के अंदर लोग फंसे थे, तो पुलिसकर्मी बगल की इमारत की छत पर चढ़े और हथौड़े से दीवार तोड़कर रास्ता बनाया।

Sachin Hari Legha

लखनऊ: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया है।  

चार अधिकारियों पर गिरी गाज   

सरकार ने जांच में शुरुआती चूक मिलने पर तुरंत एक्शन लिया। निलंबित होने वालों में जानकीपुरम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर गौरव कुमार, इंदिरा नगर के फूड सेफ्टी ऑफिसर कमलेंद्र कुमार सिंह, असिस्टेंट इंजीनियर अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई संभावित लापरवाही और जवाबदेही तय करने के लिए की गई है। जांच पूरी होने तक आगे की कार्रवाई तय होगी।  

तीन गिरफ्तार, हिरासत में मुख्य आरोपी   

अलीगंज पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश फायर सर्विस एक्ट के तहत FIR दर्ज की है। मामले में छह लोगों को नामजद किया गया है। अब तक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषांक कृष्ण जायसवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक मुख्य आरोपी को भी हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच और सबूतों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।  

रेस्क्यू के दौरान पुलिस ने तोड़ी दीवार   

आग लगने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिसकर्मियों ने बहादुरी दिखाई। जब बिल्डिंग के अंदर लोग फंसे थे, तो पुलिसकर्मी बगल की इमारत की छत पर चढ़े और हथौड़े से दीवार तोड़कर रास्ता बनाया। इससे रेस्क्यू टीम को अंदर पहुंचने और लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली। घटनास्थल की तस्वीरों में अधिकारी मुश्किल हालात में तेजी से काम करते दिखे।  

इमारत की पुरानी फाइलें खंगाल रहे अधिकारी   

जांच में सामने आया है कि जिस 1,992 वर्ग फुट की प्रॉपर्टी में आग लगी, वह 1980 में लॉटरी के जरिए अलॉट हुई थी। इसके बाद कई बार इसका मालिकाना हक बदला। 2013 में यह वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला के नाम हुई। LDA ने 2014 में यहां रिहायशी इमारत का नक्शा मंजूर किया था।  

2016 में LDA ने अनधिकृत निर्माण का आरोप लगाकर गिराने का आदेश दिया था, लेकिन मालिकों के आपत्ति जताने पर वही आदेश वापस ले लिया गया। अब हादसे के बाद अधिकारी दोबारा नक्शा, निर्माण और फायर सेफ्टी नियमों की जांच कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि हादसे के सभी पहलुओं की गहराई से जांच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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