इंसानों के साथ बेजुबान भी बने आग का शिकार, लखनऊ अग्निकांड की एक और दर्दनाक कहानी

लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए. वहीं, आग से घिरी इमारत में इंसानों के साथ-साथ कई बेजुबान जानवर भी फंस गए थे.

Shraddha Mishra

लखनऊ: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया. इस दर्दनाक हादसे में जहां 15 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए, वहीं एक ऐसी कहानी भी सामने आई जिसने लोगों को भावुक कर दिया. आग से घिरी इमारत में इंसानों के साथ-साथ कई बेजुबान जानवर भी फंस गए थे, लेकिन अफरातफरी और जान बचाने की जद्दोजहद के बीच उनकी ओर ध्यान देने वाला शायद ही कोई था.

जिस इमारत में आग लगी, उसके निचले हिस्से में पालतू जानवरों की देखभाल और ग्रूमिंग से जुड़ी एक दुकान भी संचालित हो रही थी. आग लगने के बाद पूरे परिसर में भगदड़ मच गई. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे. कुछ लोग तारों और अन्य सहारों के जरिए ऊपर से नीचे उतरने की कोशिश कर रहे थे. इसी बीच कई पालतू कुत्ते और बिल्लियां भी अंदर फंसी रह गईं.

आग बढ़ने के साथ बढ़ी बेजुबानों की मुश्किल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में आग इतनी भयावह नहीं थी. कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था और कुछ पालतू जानवरों को भी बचा लिया गया. लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी इमारत उसकी चपेट में आ गई. एक युवक, जो अपने पालतू कुत्ते को ग्रूमिंग के लिए वहां लेकर आया था, ने बताया कि शुरुआती समय में हालात संभाले जा सकते थे, लेकिन आग तेजी से फैलने के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई. इसी दौरान कई जानवर अंदर ही फंस गए.

पुलिस, फायरकर्मियों और स्थानीय लोगों ने दिखाई संवेदनशीलता

हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ जानवरों को बचाने का भी प्रयास किया. कई पुलिसकर्मी अपनी गोद में कुत्तों और बिल्लियों को लेकर बाहर आते दिखाई दिए. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया. कुछ स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों ने भी बचाव कार्य में सहयोग किया. उन्होंने जोखिम उठाकर अंदर फंसे जानवरों को बाहर निकालने की कोशिश की. कई जानवरों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन आशंका है कि कुछ बेजुबान आग और धुएं के बीच अंदर ही फंस गए.

दुकान और क्लिनिक में मौजूद थे कई जानवर

घटनास्थल पर पहुंची एक एनिमल एक्टिविस्ट ने बताया कि आग लगने के समय दुकान और उससे जुड़े क्लिनिक में करीब 20 से 22 कुत्ते और पिल्ले मौजूद थे. इसके अलावा लगभग एक दर्जन बिल्लियां और उनके बच्चे भी वहां थे. फायर ब्रिगेड की कार्रवाई के दौरान कुछ बिल्लियों को बाहर निकाला गया, जो पूरी तरह पानी में भीगी हुई थीं और डरी-सहमी हालत में थीं. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कुल कितने जानवरों को सुरक्षित बचाया जा सका.

हादसे के बाद उठे कई सवाल

इस दुखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की. शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आई है कि इमारत में आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि भवन में बिना जरूरी एनओसी के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं. 

ऐसे में हादसे के बाद जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों का मानना है कि यदि सुरक्षा नियमों का समय रहते पालन किया गया होता, तो शायद इतने लोगों और बेजुबानों की जान खतरे में नहीं पड़ती. यह हादसा केवल इंसानी नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि उन मासूम बेजुबानों की भी दर्दभरी दास्तान है, जो अपने मालिकों के भरोसे थे, लेकिन अचानक आई इस त्रासदी का शिकार बन गए.

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